उमरिया।
जिला न्यायालय से अपना चुनाव शून्य घोषित होने के बाद चंदिया नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सरस्वती मांझी को हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद थी लेकिन हाईकोर्ट ने सरस्वती माझी के चुनाव को शून्य घोषित करने वाले उमरिया जिला न्यायालय के फैसले को सही ठहराया है और इस संबंध में आदेश पारित कर उनका चुनाव एक बार फिर से शून्य घोषित कर दिया। चंदिया नगर परिषद का चुनाव 2015 में हुआ था और इसे इसी साल शून्य घोषित किया गया है।
नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गई सरस्वती माझी के खिलाफ गलत जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करके चुनाव लड़ने का आरोप मंजू कोल ने लगाया था। मंजू कोल भारतीय जनता पार्टी की टिकट से चुनाव लड़ी थी और दूसरे नंबर पर रहीं। चुनाव हारने के बाद ही वे सरस्वती मांझी के खिलाफ न्यायालय चली गई। जिला न्यायालय से फैसला आने के बाद सरस्वती माझी इस फैसले के विरोध में हाईकोर्ट चली गई थी।
ये है मामला
उमरिया जिले के चंदिया नगर परिषद के महिला अध्यक्ष सरस्वती मांझी के 2015 को हुए निर्वाचन को मई 2018 में द्वितीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने एक फैसले में शून्य घोषित कर दिया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय व सूर्यप्रकाश गुप्ता ने बताया कि चंदिया नगर परिषद के वर्ष 2015 को हुए अध्यक्ष पद के
चुनाव में यह पद महिला अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। निर्वाचन के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती मांझी ने याचिकाकर्ता भाजपा प्रत्याशी मंजू कोल को पराजित कर विजयी रही और चुनाव के कुछ समय उपरांत भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इस चुनाव में याचिकाकर्ता मंजू कोल ने श्रीमती मांझी के द्वारा गलत जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुनाव में भाग लेने का आरोप लगाते हुए निर्वाचन में प्रस्तुत प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए कहा कि श्रीमती मांझी पिछड़ा जाति की है और निर्वाचित पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। मंजू कोल ने निर्वाचन शून्य घोषित करने के लिए द्वितीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश उमरिया राजेश तिवारी के न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। न्यायाधीश ने आज याचिका में सुनवाई उपरांत अपने निर्णय में याचिकाकर्ता की निर्वाचन याचिका को स्वीकार करते हुए चंदिया नगर परिषद के अध्यक्ष श्रीमती मांझी के 2015 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया।