
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। जंगल से निकलकर गांवों में पहुंचने वाले जंगली हाथियों ने कई ग्रामीणों के आशियाने उजाड़ दिए हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों के लिए क्षतिग्रस्त मकान को दोबारा बनाना आसान नहीं होता। ऐसे परिवारों को अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद वन विभाग हाथियों द्वारा तोड़े गए मकानों का सर्वे कराने की तैयारी में है। सर्वे के जरिए प्रभावित मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाकर उन्हें चिह्नित किया जाएगा, ताकि मुख्यमंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने शहडोल में घोषणा की थी कि जंगली हाथियों द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए मकानों का निर्माण वन विभाग कराएगा। इस घोषणा से उन ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके घर हाथियों के उत्पात में ध्वस्त हो गए हैं।
अब विभागीय स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। सर्वे में मकानों की स्थिति और नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद ही प्रभावित परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
मध्य प्रदेश में जंगली हाथियों की मौजूदगी लगातार वन विभाग और जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। छत्तीसगढ़ सीमा से लगे अनूपपुर, सीधी और शहडोल के अलावा उमरिया, डिंडौरी, मंडला और कटनी जिलों में भी हाथियों की आवाजाही ग्रामीणों की परेशानी बढ़ाती है। जंगल से सटे गांवों में हाथियों के पहुंचने पर फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ मकानों के टूटने और जनहानि का खतरा भी बना रहता है।
हाथियों द्वारा मकान तोड़ दिए जाने के बाद प्रभावित ग्रामीणों को दोबारा घर बनाने के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ऐसे परिवारों के पास इतने संसाधन नहीं होते कि वे तुरंत नया मकान खड़ा कर सकें।
कई बार उन्हें अस्थायी ठिकानों पर रहने या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में वन विभाग द्वारा मकान बनवाने की घोषणा उनके लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, प्रभावित परिवारों को वास्तविक राहत सर्वे पूरा होने और निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही मिल सकेगी। अब ग्रामीणों की निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
उम्मीद है कि सर्वे में किसी भी पात्र प्रभावित परिवार को छूटने नहीं दिया जाएगा और मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप बेघर हुए लोगों को दोबारा सुरक्षित आशियाना उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
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