जंगल में फायर नहीं फ्लावर होना चाहिए
संजय कुमार शर्मा। उमरिया पुष्पा फिल्म के डायलाग 'पुष्पा नाम सुनकर फ्लावर समझे क्या, फ्लावर नहीं फायर है' को वन विभाग के अधिकारियों ने तब्दील कर नारा बना दिया है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि जंगल में फायर नहीं फ्लावर होना चाहिए। दरअसल गर्मी में जंगल में आग लगती है और इसके पीछे ग्रामीणों का बड़ा हाथ होता है। जंगल में महुआ का फूल ग्र
By Nai Dunia News Network
Edited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 16 Feb 2022 12:10:11 AM (IST)
Updated Date: Wed, 16 Feb 2022 12:10:11 AM (IST)

संजय कुमार शर्मा। उमरिया
पुष्पा फिल्म के डायलाग 'पुष्पा नाम सुनकर फ्लावर समझे क्या, फ्लावर नहीं फायर है' को वन विभाग के अधिकारियों ने तब्दील कर नारा बना दिया है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि जंगल में फायर नहीं फ्लावर होना चाहिए। दरअसल गर्मी में जंगल में आग लगती है और इसके पीछे ग्रामीणों का बड़ा हाथ होता है। जंगल में महुआ का फूल ग्रामीणों की आय का बड़ा स्रोत होता है। इसके लिए गांव के लोग जंगल में आग लगा देते हैं। इसलिए गर्मी से पहले ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है कि वे जंगल में आग न लगाएं, अन्यथा उन पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
आग लगाई तो यह सजा, जुर्माना भी : वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों को बता रहे हैं कि वे जंगल की वजह से आय अर्जित करते हैं। इसलिए जंगल को सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेदारी है। अगर उन्होंने जंगल में आग लगाई तो दो साल का कारावास और पांच हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है।
पत्तों में लगाते हैं आग : गर्मी में महुआ के पेड़ के नीचे बड़ी मात्रा में पत्ते झड़ कर सूख जाते हैं। महुए के फूल जब गिरते हैं तो वे इन्हीं सूखे पत्तों के नीचे छिप जाते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण महुए के फूलों के गिरने से पहले पेड़ों के नीचे पत्तों में आग लगा देते हैं। पिछले वर्ष आग लगने से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कई हेक्टेयर का जंगल जलकर नष्ट हो गया था। कई वन्य प्राणी भी मौत के मुंह में चले गए थे।