
उमरिया। जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अंतर्गत पनपथा परिक्षेत्र के ग्राम बकेली में लगभग बीस से बाइस दिन के अंतराल में घुसी बाघिन को दूसरी बार पकड़ने के बाद माफी नहीं मिली बल्कि उसे बाड़े में डाल दिया गया है। इससे पहले यह बाघिन पिछले महीने की 21 तारीख को भी गांव में घुस गई थी, लेकिन उस समय यह बेहद कमजोर लग रही थी।
पिछले महीने भी बकेली गांव से रेस्क्यू किया था
इस बाघिन को पिछले महीने भी बकेली गांव से रेस्क्यू किया गया था, लेकिन तब इसे जंगल में ही छोड़ दिया गया था। पर इस बार बाघिन को बाड़े में कैद करने की सजा दे दी गई है। जानकारी के अनुसार बाघिन को गांव के पास ही एक खेत से रेस्क्यू कर ताला रेंज मे बनाये एक बाड़े मे रखा गया है। जहां चिकित्सक और विशेषज्ञ उसकी हर गतिविधि पर नजर बनाये हुए हैं।
बाद में होगा निर्णय
बाघिन कब तक बाड़े में रहेगी इसका अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। प्रबंधन के मुताबिक आने वाले कुछ दिनो मे इस पर निर्णय लिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि गत रविवार रात यह बाघिन गांव में रामदयाल कुशवाहा के घर मे बंधे मवेशियों का शिकार करने घुस गई थी। इसी दौरान रामदयाल की नींद खुल गई। जिसके बाद बाघिन ने रामदयाल पर हमला कर दिया। इस घटना मे गंभीर रूप से घायल किसान रामदयाल कुशवाहा को तत्काल जिला अस्पताल मे भर्ती कराया गया है।
नए साल में पहले
ग्राम बकेली मे बाघिन के प्रवेश की जानकारी मिलते ही विभागीय अमला मौके पर पहुंच गया और हाथियों की मदद से बाघिन की तलाश शुरू की गई। कई घंटे बाद टीम को बाघिन एक खेत मे बैठी मिली। विशेषज्ञों ने बड़ी ही सतर्कतापूर्वक बाघिन को पहले ट्रेंक्युलाईज किया, फिर उसे उठा कर ताला लाया गया। पिछले कई महीनो से बांधवगढ़ नेशनल पार्क के मानपुर, पतौर और पनपथा रेंज मे बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे हिंसक जीवों की धमाचौकड़ी ने जंगल मे बसे ग्रामीणो के लिये समस्या बढ़ा दी है।
इस दरमियान जानवरों के हमले मे आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपनी जान से हांथ धोना पड़ा है। जबकि इन घटनाओं मे कई ग्रामीण घायल भी हुए हैं। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 मे प्रबंधन द्वारा कम से कम 6 बाघों तथा 1 भालू को जंगल से पकड़ कर बाड़े मे पहुंचाया गया। वहीं सोमवार को बकेली मे हुए बाघिन के रेस्क्यू की यह पहली घटना है। बड़ी बात यह है कि आये दिन जानवरों को जंगल से पकड़ कर बाड़े मे पहुंचाने के बाद भी घटनाओं मे कोई कमी नहीं आ रही है।
लगातार विस्थापन
जंगल के आसपास बसे गांव के निकट सक्रिय बाघों को राजनैतिक दबाव में लगातार विस्थापित किया जा रहा है। हालांकि इसका कोई फायदा नजर नहीं आता। फायदा इसलिए नजर नहीं आता कि जिस स्थान से एक बाघ को हटाया जाता है वहीं दूसरा बाघ पहुंच जाता है। पिछले वर्ष बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पतौर रेंज से दो बाघ, मानपुर रेंज से दो बाघ और पनपथा बफर से एक बाघ को विस्थापित किया जा चुका है। पतौर से एक बाघ को वन विहार भेज दिया गया क्योंकि उसके पैर में चोट थी। जबकि पतौर रेंज के बकेली उमरिया गांव के पास से पकड़ी गई बाघिन को इसी जंगल में अन्यत्र छोड़ दिया गया। जबकि पनपथा और मानपुर से पकड़े गए बाघ भी बाहर भेजे गए हैं।