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विदिशा में 12 बॉटल खून चढ़ाने के बाद भी नहीं बची मासूम, अस्पताल से लेकर थाने तक हाई-वोल्टेज ड्रामा, डॉक्टर बोले- हमें थप्पड़ मारा गया

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक नवजात बच्चे की मौत के बाद डॉक्टर और बच्चे के परिजनों में विवाद हो गया है। स्वजनों का आरोप है क...और पढ़ें

By Rajendra SharmaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 14 May 2026 08:38:40 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 08:38:40 AM (IST)
विदिशा में 12 बॉटल खून चढ़ाने के बाद भी नहीं बची मासूम, अस्पताल से लेकर थाने तक हाई-वोल्टेज ड्रामा, डॉक्टर बोले- हमें थप्पड़ मारा गया
विदिशा में नवजात की मौत पर जमकर हंगामा हुआ है

HighLights

  1. विदिशा में नवजात की मौत पर जमकर हंगामा हुआ है
  2. परिजनों और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों में विवाद
  3. यह मामला अब थाने तक पहुंच गया है

नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक नवजात बच्चे की मौत के बाद डॉक्टर और बच्चे के परिजनों में विवाद हो गया है। डॉक्टर ने जहां परिजनों पर मारपीट का आरोप लगाया है, वहीं स्वजनों का आरोप है कि 12 बॉटल खून चढ़ाने के बाद भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका और उसका जबरदस्ती पोस्टमार्टम किया जा रहा था। बुधवार को दोनों पक्षों से बड़ी संख्या में लोग कोतवाली थाना पहुंच गए जिससे माहौल गरमा गया।

हालांकि टीआई आनंद राज का कहना है कि दोनों पक्षों में समझौता करा दिया गया है। शहर की राजपूत कॉलोनी निवासी नथनसिंह राजपूत ने बताया कि आठ दिन पहले जिला अस्पताल में उनकी बहू का प्रसव कराया गया था। उसने बेटी को जन्म दिया था। डाक्टर ने उसे आईसीयू में भर्ती करा दिया। दो दिन बाद उसे वेंटीलेटर पर रखने की बात कहते हुए मेडिकल कॉलेज स्थित अस्पताल रेफर कर दिया। यहां पर बच्ची को नौ दिन रखा गया, इस दौरान उसे 12 बॉटल रक्त चढ़ाया गया, लेकिन रविवार की रात में करीब तीन बजे उसका निधन हो गया।


डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही की और जब शव लेने गए तो डाक्टरों ने बगैर पोस्टमार्टम के शव देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि हम पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे। इसी बात को लेकर विवाद हो गया था। उन्होंने मारपीट करने की बात से इंकार किया है।

प्रकरण दर्ज कराने अड़े रहे डाक्टर

इधर मेडिकल कालेज के डाक्टर्स कोतवाली थाने पहुंच गए। आन डयृटी चिकित्सक डा. राजवीर का कहना था कि बच्ची को बहुत ही क्रिटिकल अवस्था में लाया गया था परिवार को जानकारी दे,दी गई थी। जन्म के समय बच्ची रोई नहीं थी और उसे लगातार झटके आ रहे थे। उसकी सास की नली से लगातार खून का स्राव हो रहा था।

इसलिए रक्त चढ़ाया गया, बच्ची को 40 एमएल ही खून चढ़ाते थे। उसे बचाने के लिए दिन रात मेहनत की गई। इसके बाद जब बच्ची की मौत हो गई तो मौके पर माता-पिता मौजूद नहीं थे। कुछ अज्ञात लोग जिन्हें रिश्तेदार बताया गया वह वहां पहुंचे आक्रोशित हो गए और मुझे थप्पड़ मारकर जान से मारने की धमकी दी। पोस्टमार्टम को लेकर कोई विवाद नहीं था। थाने में हमने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मांग की थी।