• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • विदिशा

उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन लेना हुआ कठिन, अब जिला समिति करेगी घर–घर सत्यापन

Ujjwala Scheme: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नए रसोई गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सख्त हो गई है। योजना की पारदर्शिता सुनिश...और पढ़ें

By Ajay JainEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 29 Nov 2025 10:03:05 PM (IST)Updated Date: Sat, 29 Nov 2025 10:03:05 PM (IST)
उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन लेना हुआ कठिन, अब जिला समिति करेगी घर–घर सत्यापन
उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन लेना हुआ कठिन

अजय जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नए रसोई गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सख्त हो गई है। योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और केवल पात्र हितग्राहियों को ही लाभ दिलाने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति अब ग्राम स्तर पर चयनित पांच प्रतिशत परिवारों का अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन भी करेगी। यदि अपात्र हितग्राही को कनेक्शन जारी हुआ तो गैस सिलेंडर और चूल्हे की वापसी की जिम्मेदारी गैस एजेंसी संचालक की होगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उज्जवला योजना के आरंभिक वर्षों में पात्रता की जांच का दायरा सीमित था, जिसके कारण कई जिलों में अपात्र परिवारों तक भी कनेक्शन पहुंचने के मामले सामने आए थे। हाल ही में केंद्र सरकार से जारी निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलना चाहिए जो वास्तव में गरीब हैं और जिनके पास रसोई गैस का कोई अन्य साधन नहीं है। इसी क्रम में जिले में गठित समिति अब प्रत्येक गांव में आकस्मिक जांच कर परिवारों की पात्रता जांचेगी जिन्हें नया कनेक्शन जारी किया जाना है।


अधिकारियों का कहना है कि इस बार प्रक्रिया पूरी तरह परिणाम आधारित होगी। यदि सत्यापन के दौरान कोई आवेदक अपात्र पाया गया और फिर भी गैस कनेक्शन जारी कर दिया गया हो, तो संबंधित एजेंसी को ही दी गई सामग्री गैस सिलेंडर और चूल्हा वापस लेना होगा। सामग्री की वापसी ना होने पर सामग्री की राशि गैस एजेंसी संचालक को जमा करना होगी। इसके साथ ही एजेंसी संचालकों को हर नए आवेदन की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना और समन्वय स्थापित कर समिति से प्रमाणित सूची प्राप्त करना आवश्यक कर दिया गया है। समिति को भी हर माह बैठक आयोजित कर सत्यापन रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय को भेजनी होगी।

अब दोपहिया वाहन वाले परिवार भी होंगे पात्रप्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 1 मई 2016 को लागू हुई थी, जो वर्ष 2023 तक संचालित रही। पिछले दो वर्षों से योजना में नए पंजीयन बंद थे, लेकिन इसी माह नवंबर में केंद्र सरकार ने पात्रता नियमों में शिथिलता देते हुए पुनः पंजीयन प्रारंभ कर दिए हैं। पहले घर में रेफ्रिजरेटर, लैंडलाइन फोन या दोपहिया वाहन होने पर परिवार को योजना के लिए अपात्र माना जाता था, परंतु संशोधित नियमों में यह शर्त समाप्त कर दी गई है। इसी तरह पहले तीन कमरों का मकान होने पर भी परिवार अपात्र होता था, जबकि अब पीएम आवास या 30 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले घर को ही अपात्र की श्रेणी में रखा गया है।

सत्यापन के नियम से एजेंसी संचालक नाराजयोजना में पांच प्रतिशत परिवारों का सत्यापन कराने और हितग्राही अपात्र पाए जाने पर दी गई सामग्री वापस लेने के प्रावधान को लेकर गैस एजेंसी संचालकों में नाराजगी है। अतुल गैस एजेंसी के संचालक अतुल शाह का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, जिससे वे हितग्राही से दबावपूर्वक गैस सिलेंडर या चूल्हा वापस ले सकें। ऐसी स्थिति में सामग्री का मूल्य उन्हें स्वयं जमा करना होगा। उनका कहना है कि यदि कनेक्शन के दस माह बाद कोई हितग्राही अपात्र पाया जाता है, तो उस अवधि में जारी हुई सब्सिडी की राशि भी एजेंसी संचालक को ही जमा करनी पड़ेगी।

शाह के अनुसार, यह नियम एजेंसी संचालकों के लिए नुकसानदायक है।वर्जनयोजना के वास्तविक हितग्राहियों को ही लाभ दिलाने के उद्देश्य से जिले में आठ सदस्यीय समिति पिछले तीन वर्षों से कार्यरत है, लेकिन पांच प्रतिशत सत्यापन का प्रावधान पहली बार लागू किया गया है। इस नियम से उज्ज्वला योजना में हो रही गड़बड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।– अनिल तंतुवाय, जिला खाद्य अधिकारी, विदिशा।