विदिशा। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के जिले और विदेश मंत्री व सांसद सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा में रिश्वतखोर अफसरों की संख्या बढ़ रही है। लोकायुक्त पुलिस ने पिछले एक महीने के दौरान अलग-अलग विभागों के चार अफसरों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा।
वहीं नवदुनिया के ही स्टिंग आपरेशन में रिश्वत की मांग करने वाले आरईएस विभाग के चार अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित होना पड़ा। वीआईपी कहलाने वाले इस जिले में रिश्वतखोर अफसरों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन के आला अफसरों और जिले के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है।
एक दिन पहले रविवार की देर रात जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मनोज जैन को लोकायुक्त की टीम ने अपने सरकारी आवास में एक हजार स्र्पए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई सोमवार को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही। वाट्सएप के गु्रपों पर शहर के बुद्धिजीवियों में इसी बात पर बहस चलती रही कि आखिर विदिशा में ये क्या हो रहा है।
लोगों का कहना था कि सीएम का जिला होने के बावजूद अफसर बेलगाम हैं। कुछ लोग अपनी प्रतिक्रियाओं में नेताओं और आला अफसरों को भी लपेट रहे थे। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि सीएम महीने में दो-तीन बार विदिशा आते हैं। इसके बावजूद विभागीय अफसर बेखौफ हैं। वे सीएम की योजनाओं में ही आम नागरिकों से रिश्वत लेने से नहीं हिचकते।
महीने भर में चार अफसर पकड़ाए
जिले के दफ्तरों में लेनदेन के खेल का पता इसी बात से चलता है कि पिछले एक माह के दौरान चार अफसर खुलेआम रिश्वत लेते पकड़ाए। इनमें आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले पठारी छात्रावास के अधीक्षक चंद्रमोहन साहू, मत्स्य विभाग के सहायक संचालक अस्र्ण दीक्षित, सांची दुग्ध संघ के विस्तार अधिकारी एमसी जाटव और जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मनोज जैन शामिल हैं। ये सभी हितग्राहियों और मैदानी अमले से एक से पांच हजार स्र्पए तक की रिश्वत लेते पकड़े गए।
कलेक्टर की हिदायत बेअसर
नवदुनिया ने एक सप्ताह पहले ही पर्दाफाश मुहिम के तहत आरईएस विभाग में चल रही रिश्वतखोरी को स्टिंग के माध्यम से उजागर किया था। जिसमें विभाग के कार्यपालन यंत्री सहित चार लोगों को निलंबित किया गया। इस स्टिंग के प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर एमबी ओझा ने टीएल की बैठक में जिले के सभी विभागीय प्रमुखों को हिदायत देते हुए कहा था कि पैसा कमाना है तो विदिशा छोड़ दो। उनकी इस बात को तो किसी ने नहीं माना, बल्कि एक हफ्ते के भीतर ही जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने रिश्वत लेकर अपनी मनोवृत्ति को उजागर कर दिया।
कलेक्टर और दो विधायकों पर भारी पड़ रहा था एक जीएम
जिला उद्योग केंद्र में लगभग चार साल से महाप्रबंधक के पद पर तैनात मनोज जैन कलेक्टर सहित सत्ता पक्ष के दो वरिष्ठ विधायकों पर भारी पड़ रहा था। सूत्रों के अनुसार जैन के रिश्वतखोरी के किस्से पिछले कुछ महीनों से चर्चा में थे। इसी के चलते भाजपा के जिला अध्यक्ष एवं शमशाबाद के विधायक सूर्यप्रकाश मीणा और विदिशा विधायक कल्याणसिंह दांगी ने डेढ़ माह पहले सीधे उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को पत्र लिखकर जैन को निलंबित करने या जिले से हटाने की मांग की थी।
वहीं कलेक्टर एमबी ओझा ने भी जैन के खिलाफ उद्योग विभाग के कमिश्नर और प्रमुख सचिव को चार डीओ लेटर लिखे। इतने विरोध के बावजूद जैन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार जैन हर बार उद्योग मंत्री के स्टाफ में तैनात अपने एक रिश्तेदार के जरिए कलेक्टर और विधायकों पर भारी पड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि उनके लोकायुक्त में ट्रेप होने के बाद किसी को आश्चर्य नहीं हुआ।
गड़बड़ियों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं ये दफ्तर
जिला उद्योग केंद्र- बिना लेनदेन नहीं होता कोई काम
शहर के पीतलमिल चौराहे के समीप स्थित जिला उद्योग केंद्र का दफ्तर हमेशा चर्चाओं में रहा है। करीब डेढ़ माह पहले युवा स्वरोजगार योजना के तहत एक ही दिन में 35 अपात्र लोगों को ट्रैक्टर स्वीकृत करने का मामला उजागर हुआ था। जिसमें शहर के ही ट्रैक्टर शोरूम संचालकों ने न केवल शिकायत की थी, बल्कि दफ्तर में जाकर हंगामा भी किया था। इसके अलावा भी अन्य योजनाओं में लेनदेन की शिकायतें बनी रहीं। महाप्रबंधक जैन के पहले भी इसी विभाग का एक अधिकारी रिश्वत लेते लोकायुक्त के हत्थे चढ़ चुका है।
आदिम जाति कल्याण विभाग- लोकायुक्त के शिकंजे में फंस चुके हैं दो कर्मचारी
आदिम जाति कल्याण विभाग का दफ्तर भी गड़बड़ियों को लेकर विवादों का केंद्र बना रहता है। यहां पर अब तक दो कर्मचारी लोकायुक्त के शिकंजे में फंस चुके हैं। जिनमें एक छात्रावास अधीक्षक और एक पिछड़ा वर्ग कल्याण का एक कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा जा चुका है। वहीं विभाग के जिला संयोजक पर भी एक महिला छात्रावास अधीक्षिका की शिकायत पर न्यायालय द्वारा मामला दर्ज हो चुका है।
सीएमएचओ कार्यालय- गड़बड़ियों पर नहीं होती कार्यवाही
स्वास्थ्य विभाग का सीएमएचओ कार्यालय भी अनियमितताओं को लेकर चर्चाओं में बना रहता है। विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आम नागरिक से लेकर जनप्रतिनिधि तक शिकायत करते हैं, पर इन पर कोई कार्यवाही नहीं होती। इस कार्यालय में भी एक महिला लिपिक अपने ही विभाग के एक कर्मचारी से रिश्वत लेते पकड़ी जा चुकी है।
कृषि विभाग- खरीदी से लेकर वितरण तक में गड़बड़ी
जिले का कृषि विभाग भी जनप्रतिनिधियों पर हमेशा भारी पड़ता है। इस विभाग में किसानों को योजनाओं में बांटी जाने वाली सामग्री की खरीदी से लेकर वितरण तक में गड़बड़ी आम बात है। प्रभारी मंत्री से लेकर सांसद तक की बैठकों में जनप्रतिनिधि विभागीय अफसरों की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन अफसरों पर कोई कार्यवाही नहीं होती। 15 दिन पहले ही इसी विभाग के अंतर्गत आने वाले भूमि संरक्षण में डेढ़ करोड़ की राशि लेप्स होने का मामला खुद जिला पंचायत अध्यक्ष ने उठाया था।
विधायक बोले
सीएम से करेंगे शिकायत
जिले में अफसरों की रिश्वतखोरी प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है। जनप्रतिनिधि मंत्रियों से शिकायत भी करते हैं तो भी अफसरों पर कार्यवाही नहीं की जाती। इसी बात को लेकर जिले के भाजपा विधायक मुख्यमंत्री से मिलेंगे और मंत्रियों को उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करने का आग्रह करेंगे।
सूर्यप्रकाश मीणा, विधायक शमशाबाद
मेरी स्थिति 99 बेईमानों में एक ईमानदार जैसी
जिले के अफसरों की रिश्वतखोरी पर अंकुश नहीं लगा पाना हम जनप्रतिनिधियों की कमजोरी है। मेरी स्थिति 99 बेईमानों में एक ईमानदार जैसी है। ऐसे में मेरी कैसे चलेगी? अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिल रहा है।
कल्याणसिंह दांगी, विधायक विदिशा
जनता खुलकर करे शिकायत
जिले के अधिकारियों को ईमानदारी से कार्य करने की बार-बार हिदायत दी जाती है। इसके बावजूद कुछ अफसर नहीं मानते। जनता से अपील है कि वे रिश्वत मांगने वाले अफसर की शिकायत करें और उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़वाएं।
एमबी ओझा, कलेक्टर विदिशा