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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 01, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शिव मंदिर तक पहुंचमार्ग को विकसित करने मिली गति

लंबे समय से प्रतीक्षारत उदयपुर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण के लिए रहवासियों में सहमति बनती जा रही है। यह मार्ग न केवल प्रशासन की दृष्टि ...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Mon, 01 Feb 2021 07:38:58 PM (IST)Updated Date: Mon, 01 Feb 2021 07:38:58 PM (IST)
शिव मंदिर तक पहुंचमार्ग को विकसित करने मिली गति

गंजबासौदा(नवदुनिया न्यूज)। लंबे समय से प्रतीक्षारत उदयपुर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण के लिए रहवासियों में सहमति बनती जा रही है। यह मार्ग न केवल प्रशासन की दृष्टि से वहीं साम्प्रदायिक एकता और सदभाव के लिए भी महत्वपूर्ण बन जाएगा। नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचने के लिए जो तय मार्ग है, उसके चौड़ीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों में हिन्दू मुस्लिम समुदाय के मकान और दुकानों को हटाना सबसे बड़ी चुनौती थी जिसमें प्रशासन को सफतला मिलती दिख रही है। रविवार को एसडीएम राजेश मेहता ने मौके पर पहुंचकर सभी के बीच सहमति बनाने की पहल की और सभी लोगों ने अपनी सहमति देकर भोलेबाबा के दर तक पहुंचने के लिए अपनी जमीन देने की मंजूरी दे दी है। एसडीएम राजेश मेहता द्वारा नीलकंठेश्वर मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते में बाधा बन रहे लोगों के मकान दुकानों को हटाने के लिए सहमति बनाने के लिए उदयपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों की भीड़ के बीच सभी समुदाय के लोगों को पुरा संपदा और कानून का महत्व बताते हुए चर्चा की। इस दौरान करीब 33 मकानों ओर दुकानों को आम रास्ते के लिए तोड़ना पड़ेगा। हालाकि दोनों समुदाय के कुछ लोगों द्वारा अपने मकान स्वयं ही तोड़ना शुरू कर दिए थे। इसके अब मंदिर जाने वाला रास्ता दस फीट से बढ़कर तीस फीट तक चौड़ा हो जाएगा।

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है नीलकंठेश्वर मंदिर

मालूम हो कि शहर से करीब 18 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित उदयपुर नगर ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरासंपदा के लिए पहचान बनाए हुए है, यहां पर स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर कला और आस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। हर साल शिवरात्रि से लेकर श्रावण माह के सोमवार को उदयपुर में आस्था का मेला जैसा लगता है। उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण राजा भोज के भतीजे उदयादित्य द्वारा 1135 वीं सदी में किया था, लेकिन 19 वीं सदी में मंदिर का महत्व ज्यादा प्रकाश में आया। अब यहां रास्ता चौड़ा होने के बाद मंदिर के विकास और संरक्षण में मदद मिलेगी। वहीं शिवरात्रि के समय लगने वाले मेले में मदद मिलेगी। आम रास्ता अच्छा होने के कारण लोगों के वाहन मंदिर परिसर तक पहुंच सकेंगे। जल्द आम रास्ते के निर्माण को गति मिलेगी।


रविवार को उदयपुर पहुंचकर आम लोगों में सहमति बना दी है। मंदिर का रास्ता सभी के लिए विकसित किया जाएगा। लोगों के बीच पनपे अन्तर्विरोधों का खत्म कर उनके बीच सहमति बनाई जा चुकी है। वहीं आम रास्ते को जगह देने लोग अब सहयोग करेंगे।

- राजेश मेहता, एसडीएम, गंजबासौदा।