क्या आप ने कभी अहसास किया है कि कुछ चीजों या स्थितियों के प्रति आपको इतना अधिक और अकारण डर क्यों महसूस होता रहता हैं? आपका यह डर फोबिया हो सकता है जो आपके जीवन पर शासन कर रहा है। आइए

समझते हैं इस अनजाने डर की सायकोलॉजी को

किसी विशेष वस्तु या स्थिति के प्रति स्थाई, असामान्य और अकारण डर की ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि जिससे वह हमेशा उससे दूर भागने की कोशिश करता है। मनोविज्ञान मानता है कि यह केवल मन के एक वहम की तरह होता जो कि ज्यादा खतरनाक नहीं होता। इससे जल्द राहत पायी जा सकती है।

डिक्शनरी में शब्द फोबिया को अलग तरह से परिभाषित किया जाता है। परिभाषा कभी-कभी कई भ्रांतियां भी उत्पन्न कर देती है। क्योंकि कुछ लोग इसे फोबिया कहते है तो कुछ लोग इसे डर। जब कि डर एक चिंता और घबराहट की मनोभावना होती है जो खतरे की उपस्थिति या सन्निाकटता के कारण होती है। इसके विपरीत फोबिया तब उत्पन्न होता है जब यह डर बहुत अतिरंजित, अकारण या अनुचित हो जाता है। फोबिया किसी वस्तु, कार्य या स्थिति के प्रति भी हो सकता है। यहां कुछ सामान्य भ्रांतियां है जो लोगों को स्वाभिमानी बना कर फोबिया से

ग्रस्त कर देती है। फोबिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन जो व्यक्ति जल्द परेशान हो जाते हैं। बहुत अधिक कर्तव्यनिष्ठ होते हैं और निरंतर विचारों पर चिंतन करते रहते हैं। ऐसे लोग समाज में घुलमिल नहीं पाते हैं और अंतर्मुखी होते हैं। ऐसे लोगों में फोबिया होने का ज्यादा खतरा रहता है।

व्यवहार बदल जाता है

फोबिया से ग्रस्त इंसान के व्यवहार में बहुत बदलाव हो जाता है। वह न केवल फोबिया से संबंधित चीजों को नकारने की शुरूआत करने लगता है बल्कि साधारण फोबिया से संबंधित चिन्हों को भी नकारने लगता है। आज कुछ लोग अपने किन्हीं निजी कारणों से फोबिया का शिकार होते है, तो कुछ लोग अपने परिवार और दोस्तों के व्यवहार या बातों से। लेकिन ज्यादातर व्यक्ति अपनी रोजाना की क्रियाओं से परेशान रहने के कारण फोबिया से पीड़ित हो

जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत होती है।

क्या हैं उपाए इनसे निपटने के

मनोचिकित्सक की सलाह लें और अपने विचारों पर काबू पाने की कोशिश करें। योगाभ्यास एवं ध्यान की साधना अज्ञात भय से छुटकारा दिला सकती है। इसके अलावा अपनी जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें और वॉक पर जाएं। पसीना निकलने तक कसरत करें। हल्का और पौष्टिक भोजन करें।

भोजन में फल और हरी सब्जियों का अधिक समावेश करें। भयभीत करने वाली फिल्में न देखें। ऐसे माहौल में

भी न रहें जहां भय को पोषित किया जाता है।

तनाव और दिल के दौरे भी फोबिया के कारण

तनाव व दिल के दौरे जैसे केसों में भी फोबिया का ही विशेष हाथ होता हैं। इसका

कारण है जीवनशैली में अचानक कोई बड़ा परिवर्तन हो जाना। दो साल के बच्चों से लेकर पेशेवर युवाओं तथा वरिष्ठ नागरिकों में फोबिया उम्र, लिंग या पेशे की विभिन्नाताओं के रूप में हो सकता है। ज्यादातर केसों में ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार के आघात के अनुभव या डरावनी स्थिति घटने के कारण से भी फोबिया विकसित हो जाता है।

मनोवैज्ञानिकों का सहारा लें

कुछ सामान्य प्रकार के फोबिया ऐसे हैं जिनमें व्यक्ति उस वस्तु को छूता भी नहीं है जिसके प्रति वह डर महसूस करता है। इसके साथ-साथ उस वस्तु की कल्पना करते हुए भी डरता रहता है। अधिकतर विद्यार्थी अपने फोबिया से लड़ने के लिए मनोचिकित्सकों के पास अपना इलाज कराने के लिए जाते है। अधिकतर बच्चे अंधेरे, पुलिस और सांप, बिच्छु जैसे छोटे जीवों आदि से डरते हैं। बहुत से लोग स्टेज पर जनता का सामना नहीं कर पाते या किसी अजनबी के साथ बात करने में हिचकिचाते है। यह स्थित तनाव या इसके प्रति किसी भी व्यक्ति का अनुत्तरदायित्व न होने के कारण हो सकती है।

- डॉ. गौरव गुप्ता मनोचिकित्सक तुलसी हेल्थ केयर, नई दिल्ली

Posted By: Sonal Sharma

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