Phobia: क्या आप ने कभी एहसास किया है कि कुछ चीजों या स्थितियों के प्रति आपको इतना अधिक और अकारण डर क्यों महसूस होता रहता हैं? आपका यह डर फोबिया हो सकता है जो आपके जीवन पर कब्जा जमाए बैठा है। आइए समझते हैं क्या होता है फोबिया :

किसी विशेष वस्तु या स्थिति के प्रति स्थाई, असामान्य और अकारण डर की ऐसी स्थिति उत्पन्ना होती है जिससे मरीज सदा उससे दूर भागने की कोशिश करता है। यह केवल मन का वहम होता जो कि ज्यादा खतरनाक नहीं होता। इससे जल्द राहत पाई जा सकती है। डर एक चिंता और घबराहट की मनोभावना होती है जो खतरे की उपस्थिति या सन्निकटता के कारण होती है। इसके विपरीत फोबिया तब उत्पन्न होता है जब यह डर बहुत अतिरंजित, अकारण या अनुचित हो जाता है।

फोबिया किसी वस्तु, कार्य या स्थिति के प्रति भी हो सकता है। यहां कुछ सामान्य भ्रांतियां है जो लोगों को फोबिया से ग्रस्त कर सकती हैं। यूं फोबिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन वह व्यक्ति जो बहुत जल्द परेशान हो जाता है, बहुत अत्यधिक कर्तव्यनिष्ठ होता है, निरंतर वैचारिक चिंतन में मग्न रहता है, असामाजिक व अंतर्मुखी होता है, उन्हीं में फोबिया होने का ज्यादा खतरा रहता है।

कई हैं कारण फोबिया का

तनाव व दिल के दौरे जैसे केसों में भी फोबिया का ही विशेष हाथ होता हैं, जिसका कारण है हमारे जीने के ढंग

में नए-नए परिवर्तन आना। दो साल के बच्चों से लेकर पेशेवर युवाओं तथा वरिष्ठ नागरिकों में फोबिया उनकी उम्र, लिंग या पेशे की विभिन्नाताओं के रूप में हो सकता है। ज्यादातर केसों में ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के जीवन

में किसी प्रकार के आघात के अनुभव या डरावनी स्थिति घटने के कारण से भी फोबिया विकसित हो जाता है।

काल्पनिक भय से भयभीत

कुछ सामान्य प्रकार के फोबिया भय-संलक्षण कहलाते है। जिसमें व्यक्ति उस वस्तु को छूता भी नहीं है जिसके प्रति वह डर महसूस करता है तथा इसके साथ-साथ उस वस्तु की कल्पना करते हुए भी डरता रहता है। फोबिया से लड़ने के लिए मनोचिकित्सकों के पास आने वालों में स्टूडेंट्‌स अधिक हैं। अधिकतर बच्चे अंधेरे, पुलिस, काल्पनिक माफिया बॉस और छोटे जीव आदि से डरते हैं। बहुत से लोग स्टेज पर जनता का सामना नहीं कर पाते या किसी अजनबी के साथ बात करने में हिचकिचाते है।

क्या हैं दिखाई देने वाले लक्षण

- दिल की धड़कनों की गति बढ़ जाना

- हाथ कांपना

- सांस अटकना

- चक्कर आना

- पसीना आना

- तेज-तेज गहरी सांसे लेना

- कुछ विनाश होने का डर सताना

- अक्सर चौंकने का एहसास होना

नकारने लगता है

फोबिया से ग्रस्त एक व्यक्ति अपने व्यवहार के तरीकों में बहुत बदलाव पाता है। वह न केवल फोबिया से

संबंधित चीजों को नकारने की शुरुआत करने लगता है, बल्कि साधारण फोबिया से संबंधित चिन्हों को भी

नकारने लगता है। आज कुछ लोग अपने किन्हीं निजी कारणों से फोबिया का शिकार होते है तो कुछ लोग

अपने परिवार और दोस्तों के व्यवहार या बातों से, लेकिन ज्यादातर व्यक्ति अपनी रोजाना की क्रियाओं से

परेशान रहने के कारण होते है। ऐसे में व्यक्ति को मनोरोग विशेषज्ञ की सहायता की जरूरत पड़ती है।

Posted By: Sonal Sharma

  • Font Size
  • Close