समीर की डायरी
4 जनवरी
प्रेम जैसी कोई चीज होती होगी क्या?... हां, बस यही तो मैंने तुझसे पूछा था। तू खिलखिलाई थी, मुझे तुझ पर बहुत तेज गुस्सा आया था। हर बात तुम्हें मजाक ही लगती है। सच बता यार तू कभी सीरियस होती है...! बस तेरा यही एटिट्यूट मुझे चिढ़ाता है। और उस दिन तो सचमुच इतना गुस्सा आया था कि ... अब क्या कहूं?
सच बताऊं, मुझे कभी प्रेम-व्रेम पर बिलिव ही नहीं रहा। आज जो मैं तेरी हंसी पर गुस्सा करता हूं तो मुझे खुद ही अजीब लगता है। क्यों...? यार तू और मैं एक-से ही तो थे। हर बात का मजाक उड़ाना, हर किसी की लेग-पुलिंग। मम्मा भी कहती हैं कि 'तू कब सीरियस होगा समीर...?' मुझे तब कोफ्त होती थी। क्यों होना चाहिए सीरियस... और यदि सीरियस हो गए तो क्या बदल जाएगा। लेकिन देख आजकल मैं चाहने लगा हूं कि तू सीरियस हो जाए...।
10 जनवरी
यार तू मेरी बचपन की दोस्त है। मैंने तुझसे हर चीज शेयर की है। लेकिन इन दिनों लगने लगा है जैसे मैं बहुत कुछ तुझसे शेयर करना चाहता हूं, बस कर ही नहीं पाता। सच... इससे पहले मैंने इसे ऐसे 'फील" नहीं किया था। सोचता हूं, ऐसा क्यों हो रहा है? और ये ठीक कैसे होगा?
इन दिनों अक्सर मन डूबा-डूबा-सा रहता है और किसी काम में मन लगता ही नहीं है। पता है मुझे आजकल क्या लगता है...? मुझे लगता है कि मैं कहीं बादलों में तेरा हाथ पकड़े उड़ता रहूं। तू भी मेरे साथ बादलों में उड़ना चाहेगी क्या?
13 जनवरी
मुझे इन दिनों कुछ अच्छा-अच्छा सा लगने लगा है। लाइक... लाइक... कुछ फालतू-सी चीजें करना अच्छा लगता है। इन दिनों मोबाइल, टीवी, इंटरनेट में मजा नहीं आता है। दोस्तों के बीच बैठे-बैठे ही कहीं गुम हो जाता हूं। लगता है जैसे मैं कहीं और हूं और कहां हूं, ये मुझे खुद ही कुछ पता नहीं होता है। इट सिम्स फनी न...!
मैं सचमुच तुझे ये सब बताना चाहता हूं, फिर सोचता हूं कि ये तुझे ही क्यों बताना चाहता हूं? क्या इसलिए कि तू मेरी बचपन की दोस्त है...? या फिर...!
ओह नो, इसलिए तो मैंने उस दिन तुझसे पूछा था कि क्या प्रेम-व्रेम जैसा कुछ हुआ करता है? और तू इतनी जोर से हंसी कि मुझे बड़ा गुस्सा आया... कोई इतने सीरियस क्वेंश्चन पर इतनी तेज हंस कैसे सकता है?
22 जनवरी
अरे हां याद आया, उस दिन निक्की की वेडिंग पार्टी पर तूने जो येलो ड्रेस पहनी था न... उसमें तू बहुत खूबसूरत लग रही थी। पता है, उस दिन मुझे पहली बार लगा कि मैंने तुझे पहली बार ही देखा है।
हमेशा तो मैंने तुझे दोस्त की तरह ही ट्रीट किया था। फर्स्ट टाइम आई फेल्ट कि यू आर डिफरेंट... यू आर सो गॉर्जियस... सो ब्यूटीफूल यार...। तू तो हर किसी का ड्रीम हो सकती है। पता है उस दिन वो प्रियम ने जब तुझे कॉम्प्लीमेंट दिया तो मुझे पता नहीं क्यों गुस्सा आया? आय नो दैट प्रियम इज गुड फ्रेंड ऑफ योर्स... बट...।
मैं थोड़ा उखड़ा हुआ था, मैंने तुझसे भी रूडली बिहेव किया था। अब सोचता हूं कि तुझ पर क्यों एंग्री हुआ था मैं??? सो सॉरी यार...। तब तो गुस्से में मैं यह भी भूल गया था कि तू हफ्ते भर के लिए टूर पर जाने वाली है। और मैं तुझे सी ऑफ भी नहीं कर पाऊंगा।
सो सॉरी यार... आय एम सो सिली न!
30 जनवरी
अब मुझे सबके साथ तुझसे मिलने में मजा नहीं आता है। मैं चाहने लगा हूं कि तेरे साथ कहीं दूर... बहुत दूर जाऊं...बस गाड़ी चलती रहे...चलती रहे...हम कहीं भी नहीं रूके। जब रूके तो नदी का किनारा हो, हरी दूब हो। चिड़िया हो छोटी-छोटी लड़कियां खेल रही हो। नाव से इस पार से उस पार जाएं...। मजा आए न यदि ऐसा हो तो?
यार सो सॉरी... अब जब तू नहीं है तो कहीं मन नहीं लग रहा है। तुझे देखने का मन कर रहा है। तू इतनी बुरी है कि फोन भी नहीं रखती है, फोन होता तो कम-से-कम मैं तेरा फोटो ही देख लेता। तुझसे बात ही कर लेता।
सच कभी-कभी तू मुझे वेरी स्ट्रेंजर लगती है। इस दुनिया की ही नहीं लगती है। शायद इसलिए... या शायद... पता नहीं किसलिए मुझे लगने लगा है कि मुझे तुझसे प्यार हो गया है। क्या तुझे भी ऐसा मेरे लिए फील होता है? सोचता हूं यदि नहीं होगा तो मेरा क्या होगा यार? मैं तेरे बिना अपनी लाइफ को इमेजिन ही नहीं कर पाता हूं।
7 फरवरी
मुझे नहीं पता, तू मेरे बारे में क्या सोचती है। लेकिन मैं तेरे बारे में एकदम क्लीयर हूं। क्रिस्टल क्लीयर... आय लाइक यू... वेरी मच... आय... नहीं जानता कह पाऊंगा या नहीं। सच... अब मुझे सच में डर लगने लगा है। यू नो कितनी ही बार कितनी ही लड़कियों को मैंने आय लव यू कहा है। तुझे तो सब पता ही है... यू नो एवरीथिंग न...!
बस यही तो चिंता है यार...। मुझे तूने जिस तरह जाना है, उसके उलट जो मैं हो गया हूं सोचता हूं तू उसे सीरियसली लेगी भी...? सच अब मुझे यह भी लगने लगा है कि प्यार इंसान को क्या से क्या बना देता है। सोच तू, मैं कितना कूल था... और आज कितना 'नामाकूल' हो गया हूं...)
वो कोई शायर हुआ न क्या नाम है, आजकल एफबी पर लोग उसके बहुत शेर शेयर करते रहते हैं। हां कोई चचा गालिब हैं उनका ही शेर है शायद 'इश्क ने कर दिया निकम्मा गालिब/वरना हम भी आदमी थे काम के।' ऐसा ही कुछ... तो मैं भी अब कूल नहीं रहा यार।
सुन... इस वेलेंटाइन मैं तुझे पक्का प्रपोज करने वाला हूं।
प्लीज... प्लीज... प्लीज... यस कर देना। प्रॉमिस मैं तुझे कभी भी हर्ट नहीं करूंगा, सच्ची... प्रॉमिस।
कर देगी न...?