Tourism: बादामी कर्नाटक राज्य की एक बेहद खूबसूरत जगह है। यहां के मंदिरों, पत्थरों और इठलाते झरनों के रूप में भी संगीत है। हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। जानिए यहां जाने का तरीका और देखने लायक स्थानों के बारे में -

बादामी गुफा मंदिर - बादामी मुख्य रूप से अपने गुफा मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां पर चार अलग-अलग मंदिर स्थित हैं और हर मंदिर में उकेरी गई कला उसे सुंदरता प्रदान करती है। यहां स्थित आकर्षक बलुआ मंदिर 6वीं से 7 वीं शताब्दी के मध्य बादामी चालुक्य द्वारा बनवाए गए थे। बादामी गुफा मंदिर विशाल बलुआ चट्टानी संरचनाएं हैं जिन्हें देखकर प्रकृति की अद्‌भुत लीलाओं के प्रति मन नतमस्तक होजाता है। इन चट्टानों को मानव श्रम ने और भी आकर्षक स्वरूप में ढलने लायक बना दिया है। चट्टानों को उकेरकर बनाई गईं नक्काशीदार संरचनाएं देखने लायक हैं। इन मंदिरों में चालुक्य वास्तुकला को करीब से समझा जा सकता है।

मल्लिकार्जुन समूह का अद्‌भुत दृश्य - बादामी पहाड़ियों के मध्य दो बड़े मंदिर समूह स्थित हैं एक भूतनाथ और दूसरा मल्लिकार्जुन समूह। मंदिरों का मल्लिकार्जुन समूह यहां की झील के उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित है। एकदूसरे के समीप स्थित ये मंदिर अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला से पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं। इस मंदिर का निर्माण चालुक्य के शासनकाल के दौरान 11 वीं शताब्दी में करवाया गया था।

भूतनाथ समूह के मंदिर - अगस्त्य झील की तरफ मुंह करके खड़े दो मंदिर भूतनाथ मंदिर समूह कहे जाते हैं। ये बादामी की आकर्षक संरचनाओं में गिने जाते हैं। इन मंदिरों का निर्माण बादामी चालुक्य के शासनकाल के दौरान करवाया गया था। ये मंदिर भगवान शिव के अवतार भूतनाथ को समर्पित हैं। झील के किनारे बसा ये मंदिर कर्नाटक पर्यटन को खास बनाने का काम करते हैं। मंदिर की आंतरिक संरचना और बाहरी मंडल देखने लायक हैं। यहां केखूबसूरत नजारे आप मानसून के वक्त देख सकते हैं। इस दौरान यहां अस्थायी झरने फूट पड़ते हैं जो इस पूरे स्थान को अद्‌भुत पर्यटन स्थल में बदल सकते हैं। यहां आकर आप प्राच्य के वैभव से रूबरू हो सकते हैं।

महाकूट मंदिर समूह - बादामी के बाहरी हिस्से में महाकूट नामक छोटे गांव में महाकूट मंदिर समूह स्थित है। इन मंदिरों को देखना स्थापत्य कला के वैभव से रूबरू होने की तरह है। चट्टानों को काटकर मंदिरों के निर्माण का दर्शन यहां के मंदिरों में स्पष्ट रूप से किया जा सकता है। इन मंदिरों में पारंपरिक द्रविड़ शैली औंर नागर शैली की विशेषताओं के दर्शन होते हैं।

ऐहोल को देखना न भूलें

जो पर्यटक बादामी जाते हैं वे वहां से एक दिन का कार्यक्रम बनाकर ऐहोल भी जरूर ही जाते हैं। ऐहोल को कर्नाटक की मंदिर राजधानी भी कहा जा सकता है। इस जगह चालुक्य काल के 125 से ज्यादा मंदिर हैं। यह जगह यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में जगह बनाने का दावा समय-समय पर प्रस्तुत करती रही है। ऐहोल में दुर्गा मंदिर, लाड खान मंदिर, रावणपहाड़ी गुफा मंदिर, हुचिमल्ली मंदिर, मेगनगुडी समूह मंदिर, गौड़ा मंदिर औरअन्य कुछ मंदिर प्रमुख हैं।

कैसे पहुंचें बादामी

  • वायु मार्ग से : बादामी पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा बेलगाम है जो 190 किमी की दूरी पर स्थित है। भारत के कई प्रमुख शहरों से फ्लाइट्‌स यहां आती हैं।
  • सड़क मार्ग द्वाराः बेंगलुरू, मेंगलोर और तुमकुर से बादामी के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं।
  • रेल मार्ग द्वाराः बादामी का निकटतम रेल्वे स्टेशन हुबली है जो 100 किमी दूर है। हुबली से भी बसें मिल जाती हैं और टैक्सी तो उपलब्ध हैं ही।

शॉपिंग के लिए कई चीजें उपलब्ध

बादामी में शॉपिंग के लिए बहुत सारी चीजें नहीं हैं लेकिन जो कुछ है उसमें भी यहां की कलात्मकता झलकती है। यहां चंदन और शीशम की लकड़ियों से बनी छोटे स्मृति चिह्न विशेष रूप से आकर्षक होते हैं। इसके अलावा यहां से पारंपरिक ज्वेलरी की खरीदारी भी की जा सकती है। यहां की साड़ियां भी खास तौर पर प्रसिद्ध हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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