मुंबई की एक अदालत ने रविवार को 47 पुरुषों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिन्होंने बार गर्ल्स पर पैसे की बौछार की थी। अब इनमें से प्रत्येक को 3,000 रुपए बदलापुर के एक अनाथालय में दान करने का आदेश दिया। आमतौर पर जमानत के तौर पर जमा किया गया पैसा सरकारी खजाने में जाता है लेकिन यहां पैसा अनाथालय को दान करने को कहा गया।

ये 47 लोग टारडियो के इंडियाना बार एंड रेस्टोरेंट में छापे के दौरान पकड़ गए थे। रविवार दोपहर इनके वकीलों ने मजिस्ट्रेट सबीना मलिक के समक्ष क्षमादान की अपील की थी। लेकिन सबीना मलिक उन्हें हल्के में नहीं जाने देना चाह रही थी।

मजिस्ट्रेट मलिक का विचार था कि पुरुषों को पश्चाताप करने के लिए सलाखों के पीछे कम से कम एक दिन बिताना होगा ताकि उनके परिवार उनके द्वारा किए गए अपराध की प्रकृति को समझ सकें। आरोपियों में बार का प्रबंधक, कर्मचारी और ग्राहक शामिल थे, उनमें से अधिकांश स्थानीय निवासी थे लेकिन कुछ गुजरात और मध्य प्रदेश के थे।

जबकि मजिस्ट्रेट ने शुरू में पुरुषों को जेल जाने का आदेश दिया, उनके वकीलों ने उनकी रिहाई के लिए अनुरोध किया। वकील कमलेश मोर, जो गिरफ्तार पुरुषों में से आठ का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने तर्क दिया कि यह 'पहली और आखिरी बार था कि इन पुरुषों ने ऐसा अपराध किया।'

इस बिंदु पर, मजिस्ट्रेट मलिक और बचाव पक्ष के वकीलों ने इस बात पर बहस की कि जमानत बांड का उपयोग कैसे किया जाए। वकीलों ने एनजीओ और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पैसे दान करने का सुझाव दिया।

अंत में, मजिस्ट्रेट ने बदलापुर में सतकर्मा बालाकाश्रम चुना। अपने आदेश में, उन्होंने अपराधियों को प्रत्येक को 3,000 रुपए जमा करने का निर्देश दिया।

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