
मुंबई। मुंबई की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भीषण वर्षा के दंश से उबरने की कोशिश कर रहे महानगर में गुरुवार को एक पांच मंजिला इमारत ढह जाने से 23 लोग मारे गए।
यह इमारत दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कास्कर के घर के ठीक बगल में है। दाऊद के बचपन और जवानी के कुछ वर्ष यही गुजरे हैं।
बचावकर्मियों ने मलबे से करीब दर्जनभर घायलों को बाहर निकाल लिया है और उनका जेजे अस्पताल में इलाज चल रहा है। 20 लोगों के अभी भी मलबे में ही दबे होने की आशंका है।
इमारत करीब 117 साल पुरानी बताई जाती है। इलाके की ज्यादातर अन्य इमारतें भी 70 से 100 साल पुरानी हैं। दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार मुहल्ले की पाकमोडिया स्ट्रीट स्थित पांच मंजिला हुसैनी इमारत सुबह 8.30 बजे अचानक ढह गई।
इसमें ऊपर की मंजिलों पर नौ परिवार रहते थे और भूतल पर कुछ दुकानें थीं। 2011 में ही इसे अत्यंत जर्जर बताकर खाली करने का नोटिस दिया जा चुका था।
इसके बावजूद कई परिवार इसमें रह रहे थे और कुछ लोग भूतल पर व्यवसाय भी कर रहे थे। इमारत के भूतल पर ही एक मिठाई की दुकान थी, जहां कई मजदूर और कारीगर काम करते थे।
इन सभी के दबने की आशंका जताई जा रही है। संभवतः इस दुकान में जल रहे गैस स्टोव से ही गिरी इमारत में आग भी भड़क गई, जिसके कारण दमकल विभाग के कुछ कर्मचारी भी घायल हो गए।
राहत एवं बचाव कार्य में दमकल विभाग के अलावा एनडीआरएफ के जवान भी लगे हैं। सावधानीवश इस इमारत के अगल-बगल की इमारतों को भी आनन-फानन में खाली करवा लिया गया है।
दाऊद के भाई ने कहा, विस्फोट जैसी आवाज आई
दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कास्कर ने बताया कि जब हुसैनी इमारत गिरी तो वह घर में ही था। एक टीवी चैनल से बातचीत में उसने बताया, "मैं सोकर ही उठा था तभी मुझे विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद धूल का गुबार छा गया। हमें लगा जैसे हमारी इमारत भी हिल रही है।"
नेता बने लोगों के गुस्से का शिकार
दुर्घटनास्थल पर पहुंचे कुछ नेताओं को लोगों के गुस्से का शिकार भी होना पड़ा। बीएमसी आयुक्त अजोय मेहता को लोगों ने वहां रुकने नहीं दिया। घटनास्थल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मरने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की।
घायलों के इलाज का पूरा खर्च भी राज्य सरकार वहन करेगी। राज्य के उद्योग मंत्री और मुंबई के संरक्षक मंत्री सुभाष देसाई ने बताया कि सरकार इमारत ढहने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराएगी।
बाल-बाल बचे 30 बच्चे
इमारत के प्रथम तल पर ट्यूलिप नर्सरी नामक बच्चों का एक प्ले स्कूल चलता था। संयोग से यह स्कूल नौ बजे शुरू होता था। इस कारण इसमें आने वाले करीब 30 बच्चों की जान बच गई।
उनके अलावा उत्तर प्रदेश का रहने वाला मोहम्मद रफीक (25) नामक युवक भी बच गया। गुरुवार सुबह अपने घर जाने के लिए वह बुधवार रात अपना सामान लेने के लिए इस इमारत में आया था।
उसने बताया कि सुबह-सुबह उसके कमरे में कुछ लोग ब्रश कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने "भागो... इमारत गिरने वाली है..." की आवाज लगाई। वह तुरंत ही इमारत से बाहर निकल आया। उसके बाहर आते ही इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।