नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सूरज से रुबरू होने की योजना बना रहा है। अगले साल के पहले छह महीने में सूरज मिशन आदित्य-एल1 को अंजाम देने की इसरो की योजना है।

सोलर मिशन के बारे में जानकारी साझा करते हुए इसरो ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि आदित्य-एल1 मिशन का मकसद सूरज के कोरोना यानी बाहरी परत का अध्ययन करना है जो हजारों किलोमीटर क्षेत्र में फैली हैं। इसरोके मुताबिक सौर भौतिकी के लिए यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि कोरोना का तापमान इतना ज्यादा कैसे हो जाता है। इसरो प्रमुख के सिवन ने पिछले महीने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कोरोना पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है और सूर्य की बाहरी परत का अध्ययन करना इसलिए जरूरी है क्योंकि जलवायु परिवर्तन पर इसका काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा था कि 2020 की पहली छमाही में सोलर मिशन को लांच करने की योजना है। इसरो प्रमुख सिवन अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अगले दो-तीन साल में एक अन्य अंतरग्रहीय मिशन शुक्र पर भेजने की योजना है। आदित्य-एल1 अतिरिक्त परीक्षणों के साथ कोरोना के अलावा सूर्य के बाह्यमंडल और वर्णमंडल का विश्लेषण भी उपलब्ध करा सकता है।

इसरो ने कहा कि इसके अलावा पार्टिकल पेलोड सूर्य से उठते कण प्रवाह का अध्ययन भी किया जाएगा। इन पेलोड को धरती के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से बाहर स्थापित किया जाएगा, क्योंकि ये धरती की निचली कक्षा में उपयोगी नहीं हो सकते। गौरतलब है कि भारत ने सोमवार को अपने दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 का श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण किया।

इसका प्रक्षेपण जीएसएलवी-मार्क तीन रॉकेट से किया गया, जिसे बाहुबली नाम दिया गया है। चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा, जहां अभी तक कोई यान नहीं उतरा है। रोवर के जरिए चांद पर पानी और जीवन की संभावनाओं का पता लगाने के लिए विभिन्न तरह के अनुसंधान किए जाएंगे।

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