
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा था कि समाजवादी पार्टी के मामलों में 'घर के बाहर के लोग' हस्तक्षेप कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद में किसी को कोई संदेह नहीं था अखिलेश का इशारा किसकी तरफ था।
कभी पार्टी का सार्वजनिक चेहरा रहे और फिर पार्टी से बाहर कर दिए गए अमर सिंह इस बार जब सपा में आए हैं, तो काफी कुछ बदल चुका है। अमर सिंह जिस सपा को जानते थे, वैसी सपा अब नहीं है। कभी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के करीबी सहयोगी के रूप में देखे जाने वाले अमर 'नेताजी' के कान हुआ करते थे।
आज अमर सिंह को मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह के आदेश मानने पड़ते हैं और पार्टी के मामलों में उनका प्रभाव कम हो गया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, इस मामले में अमर सिंह की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई। हालांकि, इससे पहले अमर सिंह ने कहा था कि अखिलेश ने जब 'बाहरी' की चर्चा की थी, तो उनका इशारा मेरी ओर नहीं था।
उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह मेरे लिए भाई की तरह और अखिलेश मेरे बेटे की तरह हैं। बावजूद इसके जब भी अखिलेश कोई फैसला करते हैं, तो वह अमर सिंह के खिलाफ ही जाता है। 11 सितंबर को, अमर सिंह ने स्वतंत्र राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्र के लिए एक पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें मुलायम और उनके भाई शिवपाल यादव शरीक हुए थे।
जब मुलायम सिंह ने पार्टी के उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रमुख के पद से अखिलेश को हटाया था, तब सपा के प्रतिद्वंद्वियों ने आरोप लगाया था कि मुलायम सिंह, अमर सिंह से प्रभावित हैं। अखिलेश ने मीटिंग में शामिल हुए मुख्य सचिव दीपक सिंघल को भी हटा दिया और शिवपाल के विभागों में भी बदलाव किया।
सपा के नए माहौल में अमर सिंह की असहजता का पता पिछले महीने दिए गए उनके एक बयान से चलता है। उन्होंने कहा था कि मुलायम के करीब लोगों का पार्टी में 'अपमान' किया जा रहा है। राज्यसभा में उन्हें पीछे की बेंच पर बैठाया जा रहा है। उन्हें 'मौन' कराकर और पार्टी में दरकिनार कर दिया गया है।