• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • देश

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 25, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Amit Shah का बयान, मोदी सरकार के दौरान नहीं खुले डिटेंशन सेंटर, Congress ने लगाया था यह आरोप

Amit Shah on Detention centers: कांग्रेस ने लगाया था महाराष्ट्र में डिटेंशन सेंटर के लिए जमीन तलाशने का आरोप।

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Wed, 25 Dec 2019 08:47:50 AM (IST)Updated Date: Wed, 25 Dec 2019 11:11:09 PM (IST)
Amit Shah का बयान, मोदी सरकार के दौरान नहीं खुले डिटेंशन सेंटर, Congress ने लगाया था यह आरोप

Amit Shah on Detention centers: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इन आरोपों को खंडन किया है कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में डिटेंशन सेंटर (Detention Centres) बनवाए हैं, जहां उन लोगों को रखा जाएगा, जो नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे। अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा कि डिटेंशन सेंटर को लेकर कही जा रही बातें पूरी तरह निराधार हैं और मोदी सरकार के दौरान कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया गया है। इससे पहले महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में अस्थायी डिटेंशन सेंटर के लिए जगह तलाशी थी।

बकौल अमित शाह, विदेशी नागरिकों के वीजा शर्तों के उल्लंघन या किसी अन्य नियम के उल्लंघन की स्थिति में उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखे जाने का प्रावधान है। ऐसे विदेशी नागरिकों को वापस अपने देश भेजे जाने तक डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। इसके लिए देश के कुछ भागों में डिटेंशन सेंटर पहले से मौजूद हैं। ऐसे विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पण के पहले डिटेंशन सेंटर में रखे जाने का प्रावधान पूरी दुनिया में है। इसका एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं है।


CAA के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की अफवाहों पर सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि CAA का किसी भी विदेशी को भारत से बाहर भेजने से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने (चाहे वह किसी भी धर्म या देश का हो) की प्रक्रिया फॉरनर्स एक्ट 1946 और पासपोर्ट एक्ट 1920 के तहत की जाती है। ये दोनों कानून, सभी विदेशियों (चाहे वे किसी भी देश या धर्म के हों) को देश में प्रवेश करने, रिहाइश, भारत में घूमने-फिरने और देश से बाहर जाने की प्रक्रिया को देखते हैं। इसके तहत राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के पास अधिकार होता है, जिससे वे गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशी की पहचान कर सकता है।