
नई दिल्ली। ललित मोदी प्रकरण में घिरी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मामले में कोई भी फैसला दबाव में नहीं होगा। विवाद के लंबा खिंचने से भाजपा में चिंता जरूर है लेकिन फैसला सही वक्त पर होगा। पार्टी के संयुक्त महासचिव सौदान सिंह लगातार वसुंधरा के संपर्क में है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही केंद्रीय नेतृत्व वसुंधरा का भविष्य तय करेगा और वह भी खुद वसुंधरा को विश्वास में लेकर। वसुंधरा शुक्रवार की देर शाम दिल्ली पहुंच सकती हैं।
वसुंधरा और ललित मोदी को लेकर आए नए दस्तावेज ने परेशानी बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार नैतिक आधार पर छवि को लेकर चिंता बढ़ गई है। लेकिन बचाव का यह आधार बाकी है कि उसमें एक दोस्त की तरह रेजिडेंट स्टेटस के लिए गारंटी दी थी। सूत्रों की मानी जाए तो भाजपा में दो गुट हैं। एक नैतिक आधार पर इस्तीफे के पक्ष में है और दूसरे गुट का मानना है कि दबाव में इस्तीफा लिया तो यह भ्रष्टाचार का आरोप मानने जैसा होगा।
वैसे भी विपक्ष की ओर से इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वसुंधरा के इस्तीफे के बाद वह सदन का कार्यवाही चलने देंगे। बल्कि दूसरी ओर से दबाव और बढ़ेगा और उसे बिहार चुनाव में भी भुनाने की कोशिश होगी। एक अड़चन वसुंधरा के रुख को लेकर भी है।
सूत्र बताते हैं कि वसुंधरा को जबरन हटाने की कोशिश हुई तो राजस्थान में परेशानी बढ़ सकती है और ऐसे में पार्टी को दो मोर्चों पर जूझना होगा जो राजनीतिक रूप से सही फैसला नहीं होगा। शायद यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा, "पार्टी में सबकुछ ठीक है।" केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि किसी के इस्तीफा देने का सवाल नहीं है।
बताते हैं कि वसुंधरा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देना चाहती हैं। उनके साथ विधायकों का बड़ा समर्थन भी है। गुरुवार को उनसे मिलने के लिए विधायक भी आते रहे। संभव है कि शुक्रवार की देर शाम तक वह दिल्ली पहुंच सकती हैं। शनिवार को नीति आयोग में बैठक है। उस वक्त वह खुद केंद्रीय नेतृत्व से अपनी सफाई दे सकती हैं। उसके बाद ही कोई फैसला होगा।