
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में स्थित 12वीं ब्रिगेड के आर्मी हैडक्वार्टर पर हुए आतंकी हमले से सेना में काफी गुस्सा है। रह-रहकर आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की बातें सामने आ रही हैं।
पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाकर पीओके में मौजूद सभी आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की बात कही है। उन्होंने सरकार से यह अपील भी की है कि वह पाक के खिलाफ कड़े कदम उठाए।
इनका मानना है कि महज बातें करने से पाकिस्तान सुधरने वाला देश नहीं है। लिहाजा उसे उसकी ही भाषा में जवाब दिया जाना चाहिए। इस हमले के बाद भारत सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रूख करने का कड़ा दबाव दिखाई दे रहा है।
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यही वजह है कि इस हमले के बाद सेना अब पाकिस्तान से लगती 778 किलोमीटर लंबी एलओसी सीमा पर अपना रुख कड़ा करने की तैयारी में दिखाई दे रही है। इस मुद्दे पर मीडिया में चली बहस में यह बात साफतौर पर निकलकर आई है कि भारतीय सुरक्षा बलों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि सरकार सीमा पार हमलों पर भी विचार करे।
सुरक्षा बलों का मानना है कि सरकार को पाकिस्तानी सीमा के भीतर सीमित, लेकिन कड़े हमले करने की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए। इस बहस के दौरान यह भी निकलकर आई है कि सरकार को सीमा पार जाकर आतंकियों के ठिकाने और उन्हें मदद कर रही पाक सेना के ठिकानों को भी निशाना बनाने की इजाजत सेना को देनी चाहिए।
इसके पीछे की वजह बेहद साफ है। पाकिस्तान सेना आतंकियों की हर सभंव मदद करती है। फिर चाहे वह उन्हें हथियार मुहैया करवाने की बात हो या उन्हें सीमा पार कराने की बात, या फिर उन्हें प्रशिक्षण देने की कोई बात।
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वहीं, सरकार की ओर से इस बारे में विचार किया जा सकता है कि क्या सेना को पाकिस्तान की सीमा के भीतर आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हमले करने चाहिए। यदि ऐसा होता है तो एलओसी पर तैनात सेना और पश्चिमी फ्रंट पर एयर फोर्स के एयरबेस को अलर्ट पर रखा जाएगा, ताकि किसी भी आकस्मिक हमले का तत्काल और कड़ा जवाब दिया जा सके।
इन विकल्पों पर सरकार कर सकती है विचार
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एलओसी पर सेना तोपों की तैनाती और अन्य ऑपरेशंस को मंजूरी देने की मांग कर सकती है।
पाकिस्तानी रेड लाइन को पार करने का भी विकल्प भी खुला है।
इंफेंट्री यूनिट्स द्वारा ट्रांस-बॉर्डर ऑपरेशन चलाने पर भी विचार किया जा सकता है।
पाक सेना के ठिकानों समेत आतंकियों केे ठिकानों को तबाह करने के लिए 90 किलोमीटर तक मार करने वाले स्मर्च रॉकेट्स का प्रयोग करने पर विचार हो सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा सकता है। यह मिसाइल है 290 किलोमीटर तक मार कर सकती है।