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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 21, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

न्यूटन से पहले ही गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानते थे आर्यभट्ट

गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के संबंध में न्यूटन ने आर्यभट्ट के 1,500 साल बाद जो जानकारी दी, वह हमारे शास्त्रों में पहले से मौजूद है।

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Publish Date: Sat, 21 Feb 2015 08:41:40 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2015 12:01:08 PM (IST)
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न्यूटन से पहले ही गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानते थे आर्यभट्ट

नई दिल्ली। देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में एक और पूर्व इसरो चेयरमैन जी माधवन नायर का कहना है कि वेदों के कुछ श्लोकों में चंद्रमा पर पानी मौजूद होने का वर्णन किया गया है। इसके अलावा नायर ने कहा कि आर्यभट्ट जैसे खगोल विज्ञानियों को गुरुत्वाकर्षण बल की जानकारी आइजक न्यूटन से पहले से ही थी।

पद्म विभूषण अलंकरण से नवाजे जा चुके 71 वर्षीय नायर ने कहा कि भारतीय प्राचीन शास्त्रों और वेदों में धातु विज्ञान, बीजगणित, खगोल शास्त्र, गणित, वास्तुकला और ज्योतिष शास्त्र की जानकारी, पश्चिमी दुनिया को यह ज्ञान हासिल होने से कहीं पहले से मौजूद है।


वेदों पर एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में बोलते हुए नायर ने कहा कि वेदों में यह जानकारियां जिस तरह सूत्रों में दी गई हैं, उसके चलते आधुनिक विज्ञान के लिए इन्हें स्वीकार करना कठिन होता है। वेदों के कुछ श्लोकों में बताया गया है कि चंद्रमा पर पानी है लेकिन किसी ने इस पर विश्वास नहीं किया। अपने चंद्रयान मिशन के जरिये हमने इस बात को दुनिया में सबसे पहले साबित किया।

इसके अलावा पांचवी शताब्दी के विख्यात खगोल शास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट को लेकर नायर ने कहा कि हमें इस बात पर गर्व है कि आर्यभट्ट और भास्कर ने न सिर्फ सौरमंडल के रहस्यों को उजागर किया, बल्कि सौरमंडल के बाहर की दुनिया की भी खोज की। यह सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है।

चंद्रयान मिशन के लिए भी आर्यभट्ट के सिद्धांतों का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के संबंध में न्यूटन ने आर्यभट्ट के 1,500 साल बाद जो जानकारी दी, वह हमारे शास्त्रों में पहले से मौजूद है। नायर वर्ष 2003 से 2009 तक इसरो के चेयरमैन थे।

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