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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेरिट घोटाले में 2015 की इंटर साइंस टॉपर आस्था पर भी गाज

2015 में इंटर साइंस टॉपर रही आस्था श्रीवास्तव भी अब जांच के घेरे में आ गई है।

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Publish Date: Thu, 28 Jul 2016 12:33:07 AM (IST)Updated Date: Thu, 28 Jul 2016 12:37:09 AM (IST)
मेरिट घोटाले में 2015 की इंटर साइंस टॉपर आस्था पर भी गाज

पटना। मेरिट घोटाले की जांच में जुटी एसआइटी ने बुधवार को एक और मामला उजागर किया। 2015 में इंटर साइंस टॉपर रही आस्था श्रीवास्तव भी अब जांच के घेरे में आ गई है।

बुधवार को आस्था श्रीवास्तव के अलावा विशुन राय कॉलेज के प्राचार्य बच्चा राय की पत्नी संगीता, ससुर रामनगीना और उसके दो रिश्तेदारों विष्णु देव राय और राजवंशी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। पांचों की गिरफ्तारी के लिए एसआइटी छापेमारी कर रही है।

2015 में टॉपर रही आस्था श्रीवास्तव की बॉयोलॉजी की दो-दो कॉपियां मिली हैं। कम नंबर वाली कॉपी विशुन राय कॉलेज के ऑफिस में और अधिक नंबर वाली कॉपी बोर्ड में थी। लिखावट में कोई अंतर नहीं है। अंतर है तो सिर्फ कॉपी में।


जांच के लिए दोनों कॉपी एसआइटी फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को भेजेगी। एसआइटी को संदेह है कि 2015 में भी मेरिट में कुछ गड़बड़ी की गई। 2015 में जिस कॉलेज में विशुन राय कॉलेज का सेंटर गया था वहां के केंद्राधीक्षक से लेकर परीक्षक से पूछताछ हो सकती है।

जरूरत पड़ी तो विशुन राय कॉलेज से टॉप-20 में शामिल एक-एक अभ्यर्थी की कॉपी की जांच की जाएगी। एसआइटी की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि पूरी साजिश विशुन राय कॉलेज, जीए हाईस्कूल और बोर्ड में रची गई थी।

एसआइटी की एक टीम बुधवार को वैशाली में एडीओ रोड पर स्थित जीए इंटर हाईस्कूल में छापेमारी के लिए पहुंची। जीए इंटर हाईस्कूल को ही विशुन राय कॉलेज का परीक्षा केंद्र बनाया गया था।

टॉपर बनाने को बदल दिए गए केंद्राधीक्षक

बच्चा राय के कॉलेज का परीक्षा केंद्र वैशाली के जीए इंटर हाईस्कूल को बनाया गया था। बच्चा ने यहां भी पूरी सेटिंग की थी। परीक्षा कक्ष में एक ही नाम से दो-दो अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे थे। यहां तक की दोनों अभ्यर्थियों के नाम के साथ पिता के नाम भी समान थे।

इसके बावजूद परीक्षक सभी अभ्यर्थियों का एडमिट कार्ड देख कॉपी पर हस्ताक्षर करते रहे। जीव विज्ञान और गणित में अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए केंद्राधीक्षक को भी दो दिन के लिए बदल दिया गया था। बच्चा राय ने विशुन राय कॉलेज में दाखिला लेने वाले इंटर के छात्रों को पास कराने के लिए दो तरह के इंतजाम किए थे।

बच्चा ने बोर्ड से पहले ही बिना नाम और फोटो के एडमिट कार्ड पर मनमाने ढंग से हस्ताक्षर करा लिया था। इसके बाद एक-एक छात्र के नाम से दो-दो बार रजिस्ट्रेशन कराया। दो-दो एडमिट कार्ड बनवाया। परीक्षा के दौरान सेंटर पर 100 से अधिक छात्रों के साथ-साथ स्कॉलर भी परीक्षा दे रहे थे ताकि असली परीक्षार्थी को पास कराने के लिए सेंटर पर नकल नहीं होने पर स्कॉलर की कॉपी को मूल्यांकन केंद्र पर भेजा जा सके।

अभ्यर्थी की कॉपी को केंद्र पर ही नष्ट करने की योजना थी। दो इंतजाम फेल होने के बाद का भी प्लान बच्चा के पास था। बच्चा राय ने उत्तर पुस्तिका की डुप्लीकेट कॉपी तैयार की थी। बच्चा राय के ऑफिस में ऐसी कॉपी एसआइटी के हाथ लग चुकी है, जिसमें बोर्ड का लोगो और कॉपी के कोने में पंच छोड़ सब कुछ एक समान था।

इस कॉपी पर छात्र से सभी सवालों का उत्तर बच्चा अपने कॉलेज में लिखवाता था और बाद में बिहार बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद की मदद से मूल्यांकन केंद्र पर भिजवा देता था।