नई दिल्ली। भारत का दबाव आखिरकार रंग लाया और चीन झुक गया। लद्दाख क्षेत्र के चुमार में घुसपैठ कर तंबू गाड़े बैठे चीनी सैनिकों ने अपनी हद में लौटना शुरू कर दिया। इसके साथ ही भारत और चीन के बीच बीते करीब एक पखवाड़े से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चुमार में चला आ रहा सैन्य गतिरोध सुलझ गया।

सरहद पर फिलहाल स्थिति यह है कि चीनी सैनिकों ने अपनी सीमा में वापसी शुरू कर दी है और 30 सितंबर तक चुमार क्षेत्र से उनकी वापसी पूरी तरह से हो जाएगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मुद्दे के समाधान को एक बड़ी उपलब्धि बताया। चीन ने भी कहा कि दोनों देशों आपसी सहयोग से सीमा पर शांति बनाए रखने में सक्षम हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के मौके पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी की सुषमा स्वराज से मुलाकात में भी सीमा मामले को लेकर बात हुई थी। बाद में मीडिया से बातचीत में विदेश मंत्री स्वराज ने कहा, "खुशी है दोनों देश साथ बैठे और (सीमा पर जारी गतिरोध के) मुद्दे को हल निकाल लिया। समय सीमा तय की जा चुकी है। चीनी सैनिकों की वापसी 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी।"

चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। सुषमा स्वराज के बयान का हवाला देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया, "मामले को प्रभावी तरीके से सुलझा लिया गया है। अब सीमा क्षेत्र में पूरी तरह से शांति है। हमारा विश्वास है कि भारत के साथ प्रयासों से हम सरहदी इलाके में अमन कायम रख सकते हैं।"

गौरतलब है कि सहमति के इस एलान से पहले सेना और कूटनीतिक स्तर पर काफी कोशिशें चली। इस कड़ी में गुरुवार को चुशूल में फ्लैग मीटिंग भी हुई थी।

17-19 सितंबर के बीच चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की यात्रा के दौरान भी लद्दाख के देमचौक व चुमार इलाके में बने सैन्य गतिरोध का मुद्दा ही छाया रहा था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी माना कि चीनी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सीमा पर हुई घटना की छाया कहीं न कहीं बनी रही। हालांकि उनका दौरा अपने आप में ऐतिहासिक था और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिले।

गतिरोध उस समय उभरा जब गत दिनों चीनी सड़क निर्माण मजदूर सीमा लांघ भारतीय हद में आ गए थे। उनका कहना था कि उन्हें भारतीय हद में 5 किमी अंदर स्थित तिबले तक सड़क बनाने की इजाजत है। उन्हें हटाने के लिए हुई कार्रवाई के बाद बाद चीनी सैनिक आगे आ गए थे। चीनी सैनिक चुमार क्षेत्र में तंबू लगाकर जम गए थे।

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