नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आरटीआई अर्जी के जवाब में गुमराह करने वाली सूचना देने पर सेना को फटकार लगाई है। जम्मू-कश्मीर के पथरीबल फर्जी मुठभेड़ मामले में सेना ने आरटीआई कानून की धारा 8 (1) (एच) का हवाला देते हुए जानकारी देने से मना कर दिया था। इस धारा के तहत जांच या मुकदमे की कार्यवाही के दौरान जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की छूट है।

सीआईसी में सुनवाई के दौरान सेना के इस दावे की पोल खुल गई। सेना के प्रतिनिधि ने स्वीकार किया कि इस मुठभेड़ के लिए सैन्य अदालत में मुकदमा नहीं चला। उसने कहा चूंकि सैन्य अदालत में मुकदमा नहीं चला, इसलिए इस संबंध में कोई रिकॉर्ड दिखाने के लिए नहीं है। इस पर सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने मामले को गंभीरता से लिया।

उन्होंने सेना को ऐसे भ्रामक जवाब देने से बचने के लिए चेताया। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव के वेंकटेश नायक ने इस संबंध में आरटीआइ अर्जी दी थी। वर्ष 2000 में हुए पथरीबल मुठभेड़ में पांच लोग मारे गए थे।

नायक ने जम्मू-कश्मीर में 2010 में हुए माछिल मुठभेड़ से संबंधित जानकारी भी मांगी थी। लेकिन सेना ने जानकारी देने से मना कर दिया था। उसके मुताबिक, यद्यपि इस मामले में सैन्यकर्मियों को दोषी करार दिया गया लेकिन अर्जी दाखिल करने के समय सैन्य प्रशासन से इसकी पुष्टि नहीं हुई, इसलिए मुकदमा पूरा होना नहीं कहा जा सकता। इस पर आयोग ने सेना को माछिल मुठभेड़ संबंधित मांगी गई सभी जानकारी आवेदनकर्ता को देने का आदेश दिया।

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