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राज्यसभा चुनाव 2026: मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका, नामांकन रद होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद होने के बाद कांग्रेस द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका क...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 12 Jun 2026 01:51:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jun 2026 01:58:32 PM (IST)
राज्यसभा चुनाव 2026: मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका, नामांकन रद होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को झटका दिया है

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को झटका दिया है
  2. कोर्ट ने कहा कि वह याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं
  3. अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप तय न होने का दिया था तर्क

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद होने के बाद कांग्रेस द्वारा दायर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं है।

कांग्रेस और अभिषेक मनु सिंघवी ने दी दलीलें

मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि संबंधित मामले में मीनाक्षी नटराजन पर अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RoP Act) के तहत किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने के लिए आरोपों का तय होना एक अनिवार्य शर्त है। सिंघवी ने सवाल उठाया कि जब आरोप ही तय नहीं हुए, तो चुनाव अधिकारी ने नामांकन कैसे रद्द कर दिया?


इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या वे ऐसा कोई पिछला फैसला दिखा सकते हैं, जिसमें अदालत ने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को पलटकर नामांकन स्वीकार किया हो? इस पर सिंघवी ने कहा कि जब तथ्य सामने आते हैं, तो कोर्ट कानून लागू करता है।

भाजपा और मुकुल रोहतगी ने किया विरोध

दूसरी तरफ, भाजपा उम्मीदवार का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कांग्रेस की याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि नामांकन पत्र खारिज होने से किसी के मौलिक अधिकार (Fundamental Right) का उल्लंघन नहीं होता है। इसलिए, संविधान के अनुच्छेद 32 (रिट अधिकार क्षेत्र) के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती।

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रोहतगी ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 (हाई कोर्ट का रिट अधिकार क्षेत्र) के माध्यम से किसी भी न्यायिक हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लगाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारी का फैसला सही हो या गलत, इसका समाधान केवल चुनावी ट्रिब्यूनल (Election Tribunal) के पास ही हो सकता है।