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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उप्र जल निगम अध्यक्ष को अवमानना नोटिस

217 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दाखिल कर फैसले के मुताबिक सेवानिवृत्ति लाभ दिलाए जाने की मांग की है।

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Publish Date: Tue, 28 Oct 2014 12:02:55 AM (IST)Updated Date: Tue, 28 Oct 2014 12:03:45 AM (IST)
उप्र जल निगम अध्यक्ष को अवमानना नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के मुताबिक सेवानिवृत्त लाभ न देने का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार, जल निगम अध्यक्ष व अन्य लोगों को अवमानना नोटिस जारी किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 2 जुलाई को आदेश दिया था कि जल निगम 2001 से 2005 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को 58 के बजाय 60 वर्ष में सेवानिवृत्त मानते हुए वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ दे। निगम ने यह लाभ सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को दिया था जिन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

अब 217 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दाखिल कर फैसले के मुताबिक सेवानिवृत्ति लाभ दिलाए जाने की मांग की है। सोमवार को मामले में सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुबोध मार्केंडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सभी को लाभ मिलना चाहिए था लेकिन जल निगम ने सिर्फ उन्हीं लोगो को फैसले का लाभ दिया है जिन्होंने याचिका दाखिल की थी।


उन्होंने अपनी दलीलों के समर्थन में कोर्ट के फैसले के उस अंश का हवाला दिया जो सभी कर्मचारियों को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होने के अनुसार लाभ देने की बात कहता है। हालांकि जल निगम की ओर से पेश वकील ने याचिका का विरोध किया और कहा कि लाभ सिर्फ कोर्ट आने वालों को मिलेगा।

कोर्ट ने वकील का ध्यान भी फैसले के उस अंश की ओर दिलाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका में प्रतिपक्षी बनाए गए जल निगम के अध्यक्ष आजम खां, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश के शहरी विकास सचिव, जल निगम के प्रबंध निदेशक और चीफ इंजीनियर को अवमानना नोटिस जारी किया।

अवमानना नोटिस जारी होने पर जल निगम के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि जल निगम अध्यक्ष आजम खां को निजी पेशी से छूट दे दी जाए। पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए आजम को निजी पेशी से छूट तो दे दी, लेकिन कहा कि इस दौरान उन्हें कोर्ट का आदेश लागू करना होगा। यह मामला 2001 से 2005 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित है।

सरकार ने जल निगम कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष रखी थी जबकि 2001 में राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ा कर 60 वर्ष कर दी गई थी।

इसी आधार पर जो कर्मचारी जल निगम बनते समय राज्य सरकार से स्थानांतरित कर निगम भेजे गए थे उन्होंने 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति का अधिकार मांगते हुए मामले को कोर्ट में चुनौती दी थी और बाद में कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया था।