नई दिल्‍ली। सीबीआई के डीआईजी नीरज कुमार और अंडरवर्ल्‍ड सरगना दाऊद इब्राहिम के बीच संपर्क मनीष लाला ने कराया था। वह दाऊद का कानूनी रणनीतिकार था। कुमार ने बताया कि लाला के पास कोई कानूनी डिग्री नहीं थी। मगर, उसे कानून की गजब की समझ थी।

नीरज कुमार ने बताया कि मुंबई में 1993 में हुए बम धमाकों के 15 महीने बाद दाऊद सरेंडर करना चाहता था। डी कंपनी के कुछ गुर्गों से पूछताछ के दौरान नीरज कुमार को मनीष लाला के नाम का पता चला था। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि लाला से उनकी मुलाकात मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में हुई थी। तब लाला ने दाऊद के आत्मसर्मपण करने की इच्छा का खुलासा किया था।

उसने कहा था दाऊद मुंबई के सीरियल धमाकों में अपनी बेगुनाही साबित करना चाहता है। उसके इस खुलासे से मैं चौंक गया था क्‍योंकि पुलिस के पास दाऊद के खिलाफ काफी सबूत मौजूद थे। मुंबई पुलिस के बाद सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गई थी।

नीरज कुमार ने बताया कि ये बातें मनीष लाला ने मुझे इसलिए बताई थीं क्‍योंकि वह पहली ही मुलाकात में मेरे शिष्‍ट व्यवहार का कायल हो गया था। जब वह मुझसे मिला तो मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। तब लाला ने मुझसे कहा कि पहली बार किसी पुलिस अधिकारी ने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा है।

हालांकि, बात आगे नहीं बढ़ सकी और 4 जून 1998 को दाऊद के दुश्मन छोटा राजन के गुर्गों ने उसकी हत्या कर दी थी। किताब में होगा खुलासा दिल्ली पुलिस कमिशनर के पद से नीरज कुमार जुलाई 2013 में रिटायर हुए थे। मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए 13 सीरियल ब्‍लास्‍ट के मामले की सीबीआई जांच का नेतृत्व उन्‍होंने किया था। इसमें 257 लोगों की जान गई थी और 700 लोग घायल हुए थे।

अंडरवर्ल्ड के मामलों के विशेषज्ञ नीरज कुमार अपने 37 साल के कार्यकाल के दौरान की 10 शीर्ष तहकीकतों पर एक किताब लिख रहे हैं। इस किताब का एक अध्याय उनकी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की बातचीत पर आधारित होगा। इस अध्याय का शीर्षक है ‘डायलॉग विद द डॉन’।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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