यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
काम की खबर: फ्लाइट में देरी हो तो गुस्सा न दिखाएं, DGCA के इन नियमों के आधार पर करें कार्रवाई
DGCA Rule यदि किसी एयरपोर्ट पर ऐसी कोई घटना होती है तो सुरक्षा एजेंसी को एक्शन लेना चाहिए।
By Sandeep ChoureyEdited By: Sandeep Chourey
Publish Date: Wed, 17 Jan 2024 09:03:59 AM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jan 2024 11:07:58 AM (IST)
मुआवजे के तौर पर 5000 रुपए ज्यादा देने होंगे। अगर आपकी फ्लाइट का समय 2 घंटे का है तो 7,500 रुपए का मुआवजा और 2 घंटे से ज्यादा की फ्लाइट पर 10 हजार का मुआवजा देना होगा।HighLights
- फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी 24 घंटे पहले नहीं दी जाती है तो यात्री को रिफंड के साथ ही मुआवजा भी देना पड़ेगा।
- मुआवजा फ्लाइट के समय के आधार पर मिलता है। इसे उदाहरण से समझ सकते हैं।
- यदि किसी फ्लाइट का समय 1 घंटे का है तो एयरलाइन को टिकट का पूरा रिफंड देना होगा।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। उत्तर भारत में घने कोहरे और खराब मौसम के कारण इन दिनों फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है। कई फ्लाइट 3 से 10 घंटे तक लेट हो रही है या फ्लाइट ऑपरेशन ही रद्द हो रहा है और इस कारण से यात्रियों को भी काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में इसी बात को लेकर दिल्ली एयरपोर्ट पर गोवा जा रही एक फ्लाइट के यात्री द्वारा पायलट के साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आया था। पायलट के साथ मारपीट करने पर यात्री के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन उसके बाद से हवाई यात्रा से जुड़े नियमों पर चर्चा तेज हो गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए कई नियम बनाए गए हैं। हवाई यात्रा से जुड़े नियमों के बारे में एक्सपर्ट यहां विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
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फ्लाइट में देरी हुई तो यात्रियों को देना होगा खाना
- यदि किसी किसी फ्लाइट का सफर ढाई घंटे का है और फ्लाइट 2 घंटे से ज्यादा देर हो चुकी हो या फ्लाइट का सफर अधिकतम 5 घंटे का हो और वो 3 घंटे से ज्यादा देर हो चुकी है तो फ्लाइट 4 घंटे या उससे ज्यादा देरी हो गई है तो यात्रियों के खाने-पीने की सुविधा विमान कंपनी को करना होगा।
वहीं यदि कोई फ्लाइट 6 घंटे से ज्यादा लेट होती है तो DGCA के नियमों के मुताबिक, इस बारे में यात्रियों को 24 घंटे पहले सूचना देना होगा। इस दौरान यात्री के पास रिफंड लेने या किसी अन्य फ्लाइट में बुकिंग करने का विकल्प भी रहेगा। एक अन्य नियम के मुताबिक, यदि कोई फ्लाइट 6 घंटे से ज्यादा लेट हो चुकी है और उसे रात 8 बजे से सुबह 3 बजे के बीच फ्लाई करना है तो यात्रियों के ठहरने की निशुल्क व्यवस्था एयरलाइन को करनी होगी। फ्लाइट के कैंसिल होने पर DGCA के नियम
- यदि कोई फ्लाइट रद्द हो जाती है तो एयरलाइन को डिपार्चर कम से कम 24 घंटे पहले यात्री को सूचना देनी होगी। वहीं यात्री से यह भी पूछा जाता है कि क्या वह किसी दूसरी फ्लाइट में सीट लेना चाहता है या पूरा रिफंड लेना चाहता है।
फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी 24 घंटे पहले नहीं दी जाती है तो यात्री को रिफंड के साथ ही मुआवजा भी देना पड़ेगा। मुआवजा फ्लाइट के समय के आधार पर मिलता है। इसे उदाहरण से समझ सकते हैं। यदि किसी फ्लाइट का समय 1 घंटे का है तो एयरलाइन को टिकट का पूरा रिफंड देना होगा और मुआवजे के तौर पर 5000 रुपए ज्यादा देने होंगे। अगर आपकी फ्लाइट का समय 2 घंटे का है तो 7,500 रुपए का मुआवजा और 2 घंटे से ज्यादा की फ्लाइट पर 10 हजार का मुआवजा देना होगा।
विशेष परिस्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा, गृह युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या सुरक्षा कारणों से फ्लाइट कैंसिल होती है तो एयरलाइन की ओर से पैसेंजर को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
पैसेंजर एयरपोर्ट पहुंच जाता है और इसके बाद यदि फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिलती है तो और यात्री ने ऑल्टरनेट फ्लाइट का ऑप्शन चुन लिया और उसका इंतजार कर रहा है, ऐसे में एयरलाइन खाना-पीना मुहैया कराएगी।
एक ही टिकट पर दो कनेक्टिंग फ्लाइट बुक हैं। एक उड़ान में देरी होने के कारण दूसरी भी छूट जाती है, तब भी खाना-पीना एयरलाइन की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। रिफंड को लेकर ये हैं नियम
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के अनुसार, अगर डेबिट/क्रेडिट कार्ड से टिकट बुक गई है तो आप रिफंड के लिए अप्लाई करते हैं तो 7 दिनों में एयरलाइन को भुगतान करना होगा। इसके अलावा टिकट यदि किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट या फिर ट्रैवल एजेंट से बुक कराई है तो एयरलाइन को 30 दिनों के भीतर रिफंड देना होगा।
- रिफंड अमाउंट कभी भी किसी भी एयरलाइन के वॉलेट में डिफॉल्ट तौर पर नहीं भेजा जाएगा। इस बारे में यात्री से पूछकर ही तय किया जाएगा कि रिफंड कहां लेना चाहता है। यात्री भी इस बारे में ध्यान रखें कि 1 महीने के भीतर ही रिफंड क्लेम करना होता है।
बोर्डिंग को लेकर ये है नियम
एयरलाइन कई बार फ्लाइट की क्षमता से अधिक टिकट बुक कर लेती हैं, ताकि अगर कोई यात्री बोर्डिंग नहीं करता है तो भी कोई सीट खाली न रह जाए। लेकिन कई बार सभी यात्री बोर्डिंग के लिए आ पहुंचते हैं। ऐसे में एयरलाइन कुछ यात्रियों को सीट न होने के कारण बोर्डिंग करने से रोक देती है। इस परिस्थिति में एयरलाइन 1 घंटे के भीतर किसी दूसरी फ्लाइट में पीड़ित के जाने की व्यवस्था करें। दूसरी फ्लाइट 24 घंटे के भीतर की बुक की है तो 10000 रुपए का मुआवजा देना होगा। DGCA के नियमों के मुताबिक, 24 घंटे से बाद फ्लाइट में सीट दी है तो यात्री को 20 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा।
नो-फ्लाई लिस्ट में कब आता है नाम
विमान नियमावली, 1937 के प्रावधान 22, 23 और 29 के तहत फ्लाइट में हुड़दंग करने, गाली-गलौज या बदसलूकी करने, अश्लील हरकत करना, शारीरिक रूप से अपमानजनक व्यवहार करने के अलावा विमान को नुकसान पहुंचाने या जान से मारने की धमकी देने. शराब पीने या ड्रग्स लेने की स्थिति में विमान से उतारा जा सकता है। डीजीसीए नियमों को लेकर एडवोकेट मनीष भदौरिया कहना है कि जमीन पर, ट्रेन में या फिर फ्लाइट में कानून तो हर जगह लागू है। यदि किसी एयरपोर्ट पर ऐसी कोई घटना होती है तो सुरक्षा एजेंसी को एक्शन लेना चाहिए। किसी दूसरे देश के एयरस्पेस/एयरलाइन में घटना होती है तो उस देश के कानून के आधार पर कार्रवाई होगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साल 2017 के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अगर कोई यात्री बार-बार दुर्व्यवहार कर रहा है तो उसे नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जा सकता है। इस लिस्ट में आने का अर्थ यह है कि यात्री फिर उस एयरलाइन से यात्रा नहीं कर सकता है, जबकि तक कि एयरलाइन बैन हटा न दे। यह प्रतिबंध कुछ माह या साल के लिए होता है।