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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भगवान हनुमान के जन्मस्थल को लेकर उठा विवाद, मामला सुलझाने के लिए नासिक में बुलाई गई धर्मसंसद

भगवान हनुमान की जन्मस्थली के विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने और शास्त्रों के आधार पर निपटाने पर सहमति बन गई है।

By Shailendra KumarEdited By: Shailendra Kumar
Publish Date: Mon, 30 May 2022 01:02:40 PM (IST)Updated Date: Mon, 30 May 2022 01:02:40 PM (IST)
भगवान हनुमान के जन्मस्थल को लेकर उठा विवाद, मामला सुलझाने के लिए नासिक में बुलाई गई धर्मसंसद

Nasik Dharma Sansad: भगवान राम और कृष्ण की जन्मभूमि को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हिन्दू संतों ने भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग दावे पेश किये हैं। मामले को बढ़ता देख महंत श्री मंडलाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी अनिकेत शास्त्री देशपांडे महाराज ने 31 मई को नासिक में धर्म संसद बुलाई है। इस धर्म संसद में देश भर के सभी साधु-संत हिस्सा लेंगे और भगवान हनुमान की जन्मभूमि के संबंध में अपने विचार रखेंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर धर्म संसद अपना फैसला सुनाएगी।

कैसे उठा विवाद?

दरअसल, कर्नाटक के एक संत महंत गोविंद दास ने दावा किया है कि भगवान हनुमान का जन्म नासिक के अजनेरी में नहीं बल्कि किष्किंधा (कर्नाटक) में हुआ था। उन्होंने बाल्मीकि रामायण का संदर्भ देते हुए दावा किया कि हनुमान जी का जन्म नासिक के अजनेरी में नहीं, बल्कि कर्नाटक के किष्किंधा में हुआ था। उन्होंने कहा कि रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहीं नहीं लिखा है कि हनुमान जी का जन्म अजनेरी में हुआ था। जन्म स्थान हमेशा एक ही स्थान पर रहता है। अपने इस दावे के पक्ष में उन्होंने शास्त्रों का भी हवाला दिया। उन्होंने नासिक के संतों से अपील की है कि वे हनुमान जी की जन्म भूमि अजनेरी है, यह सिद्ध करें। महंत गोविंद दास सोमवार को त्रंबकेश्वर पहुंचे, वह जहां हनुमान जन्मभूमि पर शास्त्रों के आधार पर नासिक के संतों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इस दावे की वजह से उठे विवाद क सुलझाने के लिए नासिक के महंतों ने 31 मई को धर्म संसद बुलाई है।


धर्म संसद में होगा फैसला

इन दिनों वाराणसी में ज्ञानवापी और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली का मामला सुर्खियों में है, और इस वजह से शांति भंग होने की आशंका बनी रहती है। सात ही इससे जुड़े मामलों अदालतों तक पहुंच गये हैं। ऐसे में भले ही महंत गोविंद दास ने हनुमान जी की जन्मस्थली को लेकर एक नई बहस छेड़ दी हो, लेकिन इस बार ये मुद्दा शास्त्रीय है और इसे धार्मिक रंग नहीं दिया गया है। फिर भी प्रशासन ने 31 मई को होने वाली धर्म संसद के मद्देनजर आयोजकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नोटिस जारी किया है।