मल्टीमीडिया डेस्क। 1975 में आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में आपातकाल लगाया गया था। उस दिन रातों-रात लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए थे। विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। अभिव्यक्ति के सभी माध्यमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वैसे भारत के इतिहास में यह पहली बार नहीं था कि जब इमरजेंसी लगाई गई हो। इससे पहले भी दो बार इमरजेंसी लगाई गई, लेकिन तब मकसद राष्ट्र की रक्षा था। इंदिरा ने जो इमरजेंसी लगाई, वो अपनी सत्ता बचाने और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए थी। जानिए इससे पहले कब-कब लगा है देश में आपातकाल -

आपातकाल का इतिहास: आपातकाल ऐसी अवधि होती है जिसमें सत्ता की पूरी कमान प्रधानमंत्री के हाथ में आ जाती है। अगर राष्ट्रपति को लगता है कि देश को आंतरिक, बाहरी या आर्थिक खतरा हो सकता है तो वह आपातकाल लागू कर सकता है। अब तक देश में तीन बार आपातकाल लागू हुआ है -

1. 26 अक्टूबर 1962 से 10 जनवरी 1968 तक: भारत-चीन युद्ध

2. 3 दिसंबर 1971 से 21 मार्च 1977 तक: पाकिस्तान से युद्ध

3. 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक: इंदिरा गांधी ने निजी स्वार्थ साधने के लिए आपातकाल लगाया।

अब संभव नहीं आपातकाल

- जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था तब दोनों सदनों में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत था। लोकसभा में 352 और राज्यसभा में 523 सीटें थीं। अब दोनों सदनों में एक साथ ऐसा बहुमत संभव नहीं।

- तब क्षेत्रीय पार्टियां आज जितनी मजबूत नहीं थीं।

- अब राज्य भी आर्थिक व राजनीतिक रूप से कहीं अधिक आजाद हैं।

- न्यायपालिका सरकार के अधीन नहीं है, जैसे 1975 में जब आजादी का अधिकार भी छीन लिया गया था।

- राष्ट्रपति को अधिकार देने वाले अनुच्छेद 352 को पहले से अधिक सुरक्षित किया गया है।

- सोशल मीडिया और कनेक्टीविटी के चलते अब खबरों पर नियंत्रम संभव नहीं है।

- वैश्विक स्तर पर भारतीय लोकतंत्र की पहचान है, ऐसे में किसी के लिए ऐसा कदम उठाना संभव नहीं है।

इंदिरा कैबिनेट के एकमात्र मंत्री जिन्होंने उठाया था सवाल

इंदिरा गांधी ने 25 जून की रात इमरजेंसी लगाने का फैसला किया था। पूरे देश को अगले दिन सुबह इसकी जानकारी दी गई थी। यहां तक कि इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल को भी अगले दिन सुबह ही पता चला। इंदिरा ने सुबह 5 बजे मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी। बैठक में जो मंत्री शामिल हुए उनमें से केवल तत्कालीन रक्षा मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह ही यह सवाल पूछने का साहस जुटा पाए कि क्या वाकई इसकी यानी आपातकाल लगाने की जरूरत है? तब इंदिरा ने उनके कान में कुछ कहा। चंद मिनटों बाद पूरे देश ने ऑल इंडिया रोडियो पर इंदिरा गांधी को इमरजेंसी का ऐलान करते सुना।

Posted By: Arvind Dubey

Assembly elections 2021
elections 2022
  • Font Size
  • Close