
मनु त्यागी, नईदुनिया, नई दिल्ली। मैं जो पानी पी रहा हूं या पी रही हूं क्या यह स्वच्छ है? कहीं यह दूषित या जहरीला तो नहीं? एक दशक से स्वच्छता की मिसाल बने इंदौर में मल-मूत्र मिला पानी पीने के कारण मचे हाहाकार के बाद से देश के हर नागरिक के मन में पानी की शुद्धता को लेकर डर बैठ गया है। यह डर वाजिब भी है, क्योंकि विकसित देश बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा भारत अब भी दूषित पानी के संकट से जूझ रहा है।
लोगों को स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी चीज भी मयस्सर नहीं है। इंदौर की तो यह सिर्फ एक घटना है। यहां तो बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आए दिन दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार पड़ते हैं। लेकिन हर बार हर राज्य, जिला, शहर उस दूषित पानी की आपूर्ति की घटना को यह भुलाकर आगे बढ़ जाता है कि सरकार, प्रशासन, संबंधित जल विभाग अब इसमें कुछ सुधार करेगा।
नईदुनिया हमेशा ही जनहित की आवाज रहा है। यह लोगों की पेयजल से जुड़ी चिंता के प्रति सजग है। स्वच्छ समाज सरोकार के तहत 11 राज्यों में अपनी 2500 रिपोर्टरों की टीम के साथ यह आपके घर तक पहुंचकर पीने के पानी की पड़ताल करेगा।
‘हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ’ अभियान के तहत नईदुनिया की टीम आपकी सोसाइटी, कॉलोनी, गांव, मोहल्ले यानी आपके द्वार तक पहुंचेगी। इस अभियान के माध्यम से हेलो नईदुनिया, पाठक पैनल जैसे आयोजन भी किए जाएंगे।