शैलेंद्र गोदियाल, उत्तरकाशी। देश की जीवन रेखा गंगा (भगीरथी) का जलस्तर गंगोत्री में काफी कम हो गया है। नतीजतन नदी घाटों से काफी दूर हो गई है। इसकी प्रमुख वजह बताई जा रही है हिमालयी क्षेत्रों में दम तोड़ते जा रहे ग्लेशियर और सर्दियों के दौरान कम बर्फबारी।

विशेषज्ञों ने जलस्तर में कमी को पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी बताया है। वैज्ञानिकों का एक दल गंगोत्री ग्लेशियर का अध्ययन करने 16 जून को गोमुख जाएगा।

गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित राजेश सेमवाल बताते कि वर्ष 2015 में गंगोत्री के कपाट 22 अप्रैल को खुल गए थे। तब भागीरथी घाटों के पास से बह रही थी। इस बार भागीरथी का जलस्तर बीते वर्ष से काफी कम है।

कहते हैं कुछ वर्षों पूर्व तक श्रद्धालुओं को स्नान के लिए घाटों तक पानी मिल जाता था। साथ ही मंदिर के आसपास बर्फ भी रहती थी। लेकिन इस बार बर्फ ऊंची चोटियों पर ही नजर आ रही है।

छूने को भी न मिली बर्फ

शीतकाल में बर्फबारी काफी कम होने के कारण गंगोत्री जाने वाले यात्रियों को बर्फ छूने तक को नहीं मिल पाई है। पिछले वर्षों में ऐसा नहीं था। गंगोत्री जाने वाले यात्रियों को धराली के पास चांगथांग में आसानी से बर्फ मिल जाया करती थी। साथ ही गंगोत्री के आसपास भी बर्फ रहती थी।

कम बर्फ-बारिश का नतीजा

पंडित गोविद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान-अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक कीर्ति कुमार का कहना है कि बीते शीतकाल में बारिश व बर्फबारी का औसत काफी कम रहा। ऐसे में नदी का जल स्तर घटना लाजिमी था। बर्फबारी अच्छी हुई होती तो गंगा का जल स्तर भी बरकरार रहता।

...तो परिणाम होंगे गंभीर

नदी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुरेश भाई कहते हैं कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर लगातार कम हो रहे हैं और बर्फ भी कम पड़ रही है। इसका असर टिहरी झील पर भी साफ देखा जा सकता है।

प्रदूषण में बढ़ोत्तरी, जंगलों का घटना और हिमालयी क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों का बढ़ना इसकी प्रमुख वजह है। इस पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।

इस बार स्नान भी चुनौतीपूर्ण

प्रसिद्ध धाम गंगोत्री में इस बार यात्रियों की आमद काफी हो रही है। इससे भागीरथी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन नदी का बहाव पहले से बने घाटों से काफी दूर होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए स्नान करना चुनौती बना हुआ है। वजह यह कि बीच में बहाव काफी तेज है, जो अनहोनी का सबब बन सकता है।

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