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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'गाय की श्रेणी में नहीं आती नीलगाय, मारना अपराध नहीं'

हरियाणा सरकार ने नीलगाय को ये कहकर मारने की इजाजत दे दी है कि नीलगाय 'गाय' नहीं है बल्कि ये हिरण की एक प्रजाति है।

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Publish Date: Sat, 19 Mar 2016 12:01:23 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Mar 2016 12:02:12 PM (IST)
'गाय की श्रेणी में नहीं आती नीलगाय, मारना अपराध नहीं'

चंडीगढ़। पिछले दिनों गाय को लेकर देशभर में चली बहस के बीच हरियाणा सरकार ने नीलगाय को ये कहकर मारने की इजाजत दे दी है कि नीलगाय 'गाय' नहीं है बल्कि ये हिरण की एक प्रजाति है और उसे मारने में कोई समस्या नहीं है।

अरावली के वन के आसपास इन दिनों नीलगाय की तादात काफी बढ़ती जा रही है और वो किसानों के खेतों में घुसकर फसल को काफी नुकसान पहुंचा रही है। पिछले कई दिनों से किसानों की तरफ से सरकार को शिकायत मिल रही है और सरकार भी नील गायों को मारने की इजाजत देने के लिए तत्पर है लेकिन ये फैसला सरकार के खिलाफ जा सकता है क्योंकि हरियाणा देश का पहला राज्य है जिसने गाय को मारने पर प्रतिबंध लगाया था।


वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि वो नीलगाय का नाम बदलकर उसका नाम रोज करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के बाद लोगों को अहसास होगा कि वो गाय की नहीं बल्कि हिरण की प्रजाति है और हिरण की प्रजाति को मारना भारत में अपराध नहीं है। इसके अलावा सरकार इस प्रजाति को कीड़े का दर्जा देने की योजना बना रही है और कीड़े को मारना देश में अपराध नहीं है।