केदारनाथ आपदा में लापता श्रद्धालुओं के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
केदारनाथ आपदा में लापता श्रद्धालुओं के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रवैया दिखाया है।
By Yogendra Sharma
Edited By: Yogendra Sharma
Publish Date: Wed, 24 Apr 2019 08:39:06 PM (IST)
Updated Date: Wed, 24 Apr 2019 10:57:24 PM (IST)

नैनीताल। केदारनाथ में जल प्रलय के दौरान लापता तीर्थयात्रियों के मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि यदि वह केदारघाटी में मिले कंकालों का डीएनए टेस्ट करा रही है तो किस प्रयोगशाला में करवा रही है और यह भी बताए कि इस मामले में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली के रहने वाले अजय गौतम ने इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक की खंडपीठ इसकी सुनवाई कर रही है। दायर याचिका में कहा गया है कि 2013 में केदारघाटी में आपदा में करीब 4200 लोग लापता थे, जिसमें से अभी तक 600 के कंकाल बरामद हुए। अब भी 3200 लोग केदारघाटी में दफन है, जिनको सरकार निकालने को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है।
इससे पहले भी कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि केदारनाथ घाटी से शवों को निकाल कर उनका अंतिम संस्कार रीति रिवाज के साथ किया जाए, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि केदारघाटी में इतने साल बाद भी मलबे में दफन शव मिल रहे हैं। लिहाजा, दफन सभी शवों को तलाश कर उनका अंतिम संस्कार कराया जाय।
इन शवों को डीएनए करवा कर परिजनों को सौंपा जाए। याचिका में यह भी जिक्र है कि राज्य सरकार के पास अब तक 900 से ज्यादा लोग शव लेने पहुंच चुके हैं। ये लोग डीएनए कराने के लिए भी तैयार हैं। खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।