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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'एकसूत्र में बांधता है हिंदू राष्ट्रवाद', विजयादशमी पर सरसंघ चालक मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को दिया संदेश

नागपुर में विजयादशमी उत्सव पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया। उन्होंने हिंसक प्रदर्शनो...और पढ़ें

By Anurag MishraEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 02 Oct 2025 12:21:04 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Oct 2025 12:21:04 PM (IST)
'एकसूत्र में बांधता है हिंदू राष्ट्रवाद', विजयादशमी पर सरसंघ चालक मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को दिया संदेश
आरएसएस ने आज नागपुर में विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया।

HighLights

  1. हिंदू राष्ट्रवाद विविधता और संस्कृति को जोड़ने वाला सूत्र है।
  2. राष्ट्र राज्य नहीं, संस्कृति ने हमेशा राष्ट्र को गढ़ा।
  3. समाज में सद्भाव बना रहे, आस्था का अपमान न हो।

एजेंसी, नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आज नागपुर में विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया। इस बार का आयोजन विशेष रहा क्योंकि संघ अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष भी मना रहा है। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भाषण देते हुए गुरु तेग बहादुर के बलिदान, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को नमन किया।

सरसंघ चालक मोहन भागवत के भाषण के प्रमुख अंश

  • सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि विविधता और हमारी संस्कृति का पूर्ण स्वीकार और सम्मान जो हम सभी को एक सूत्र में बांधता है, वह राष्ट्रवाद है, जिसे हम हिंदू राष्ट्रवाद कहते हैं। यह हमारे लिए हिंदू राष्ट्रवाद है। हिंदवी, भारतीय और आर्य सभी हिंदू के पर्यायवाची हैं।

  • हमारे पास कभी भी राष्ट्र राज्य की अवधारणा नहीं रही है। हमारी संस्कृति हमारे राष्ट्र का निर्माण करती है। राज्य आते हैं और जाते हैं, लेकिन एक राष्ट्र हमेशा के लिए रहता है। यह हमारा प्राचीन हिंदू राष्ट्र है। हमने सभी प्रकार के उत्थान और पतन देखे हैं, हमने गुलामी देखी है और हमने आजादी देखी है, लेकिन हम इन सबसे बच गए। यही कारण है कि एक मजबूत और एकजुट हिंदू समाज देश की सुरक्षा और अखंडता की गारंटी है। हिंदू समाज एक जिम्मेदार समाज है। हिंदू समाज हमेशा 'हम और वे' की इस मानसिकता से मुक्त रहा है।
  • सद्भाव का उल्लघंन न हो...

    • सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब भी कुछ विदेशी विचारधाराएं भारत आईं, हमने उन्हें अपना माना। हम दुनिया में विविधता को स्वीकार करते हैं। हमारे देश में इस विविधता को भिन्नता में बदलने का प्रयास किया जा रहा है। सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे शब्द किसी भी आस्था या विश्वास का अपमान या अपमान न करें।

  • जब समाज में विभिन्न मान्यताओं वाले कई लोग एक साथ रहते हैं, तो समय-समय पर कुछ शोर और अराजकता हो सकती है। इसके बावजूद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम और कानून के साथ-साथ सद्भाव का उल्लंघन न हो। कानून को अपने हाथ में लेना, सड़कों पर उतरना और हिंसा और गुंडागर्दी का सहारा लेना ठीक नहीं है। किसी विशेष समुदाय को भड़काने की कोशिश करना और शक्ति प्रदर्शन करना सभी पूर्व नियोजित षड्यंत्र हैं।
  • हिंसक प्रदर्शन से हासिल नहीं होता लक्ष्य

    • सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब सरकार जनता से दूर रहती है और उनकी समस्याओं से काफी हद तक अनभिज्ञ रहती है और उनके हित में नीतियां नहीं बनाई जाती हैं, तो लोग सरकार के खिलाफ हो जाते हैं। लेकिन अपनी नाखुशी व्यक्त करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करने से किसी को कोई फायदा नहीं होता।
    • अगर हम अब तक की सभी राजनीतिक क्रांतियों का इतिहास देखें, तो उनमें से किसी ने भी अपना उद्देश्य कभी हासिल नहीं किया। सरकारों वाले राष्ट्रों में हुई सभी क्रांतियों ने अग्रिम राष्ट्रों को पूंजीवादी राष्ट्रों में बदल दिया है।हिंसक विरोध प्रदर्शनों से कोई उद्देश्य हासिल नहीं होता। देश के बाहर बैठी शक्तियों को अपना खेल खेलने का मंच मिल जाता है।