
तिरुअनंतपुरम। करीब दो हजार भारतीय नर्सें स्वदेश लौटने के इंतजार में युद्धग्रस्त यमन में फंसी हुई हैं। हालांकि अब तक किसी भी भारतीय के मारे जाने की सूचना नहीं है। सोमवार को विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। यह भी खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागरिकों की सुरक्षित रिहाई के लिए सऊदी अरब के शाह से बात की और इस मामले में मदद करने को कहा है।
गत वर्ष इराक में भी दर्जनों भारतीय नर्सों का अपहरण कर लिया गया था। उसके बाद अब इस अफ्रीकी देश में भारतीय नर्सों की सुरक्षा को लेकर संकट गहरा गया है।
इस बीच, सऊदी अरब की अगुआई में खाड़ी सहयोग परिषद की सेना ने यमन में हाउदी विद्रोहियों के ठिकानों पर पांचवीं रात भी हवाई हमले जारी रखे। यमन से विद्रोहियों को भगाने के अभियान में पाकिस्तान भी सोमवार को शामिल हो गया। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया, 'विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में सऊदी अरब को हमारा पूरा समर्थन है। हम उस अभियान में शामिल होंगे।'
यमन से लौटे भारतीयों का कहना है कि विशेषकर अदन में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। इनके अनुसार, सऊदी अरब के हवाई हमलों के बाद स्थिति नाजुक हो गई है। साजेश मैथ्यू की पत्नी आशा (29) अदन के अल-नाकिब अस्पताल में तीन वर्षों से कार्य कर रही हैं। इस अस्पताल में 35 भारतीय नर्सें कार्यरत हैं। मैथ्यू ने बताया, 'अस्पताल के आसपास के इलाका अब हाउदी विद्रोहियों के कब्जे में है। शहर का बंदरगाह नष्ट हो गया है और सना की ओर जाने वाली सड़क असुरक्षित है।'
सना से सोमवार को केरल लौटे आइटी कर्मी लिजो जॉर्ज ने बताया, "वहां फंसे भारतीय अपने घर नहीं जा सकते हैं। बहुत से लोगों को भोजन-पानी मिलने में दिक्कत आ रही है। उनके वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है।"
सना के सैन्य अस्पताल से फोन पर पैरामेडिकल कर्मी रंजीत चीराकथाइल ने बताया कि कुछ लोगों के साथ वह, उनकी पत्नी और एक नर्स यहां हैं। अस्पतालों में काम करने वाले करीब 240 भारतीय स्वदेश लौटने के लिए फ्लाइट के इंतजार में हैं। अधिकतर अस्पतालों में कोई काम नहीं हो रहा है। हमलों में घायलों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। यह बहुत अमानवीय है। ऐसी स्थिति में मेरी अंतरात्मा यहां से जाने को नहीं कह रही है।
शरणार्थी शिविर के पास हवाई हमले में 45 की मौत
यमन के उत्तर-पश्चिम में एक शरणार्थी शिविर के पास हवाई हमले में कम से कम 45 लोगों के मारे जाने की खबर है। इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन फार माइग्रेशन (आइओएम) ने यह जानकारी दी है। ई-मेल के जरिये उसके प्रवक्ता जोएल मिल्लमैन ने बताया है, 'अस्थायी ठिकाने में रह रहे 45 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 65 से अधिक घायल हैं। पीड़ितों की मदद के लिए आइओएम के 75 कार्यकर्ता वहां जुटे हैं।'
मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने भी कहा है कि शिविर को निशाना बनाकर हमला किया गया था।