सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश, अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
illegal mining in Aravalli: अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल तकनीकी व्या...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 21 Jan 2026 05:15:56 PM (IST)Updated Date: Wed, 21 Jan 2026 05:15:56 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश, अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगाHighLights
- यह मामला केवल तकनीकी व्याख्या तक सीमित नहीं
- देश के पर्यावरणीय भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है
- किसी भी तरह का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
डिजिटल डेस्क। अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल तकनीकी व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के पर्यावरणीय भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसके प्रभाव अपूरणीय और दूरगामी होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अरावली पर्वतमाला की वैज्ञानिक और स्पष्ट परिभाषा तय करने के लिए एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा। इस समिति में पर्यावरण, वानिकी, भू-विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे।
अदालत ने सभी पक्षों, एमिकस क्यूरी सहित, को चार सप्ताह के भीतर समिति के संभावित सदस्यों के नाम और सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
पुराने आदेश पर लगी रोक बरकरार
अदालत ने अपने उस पूर्व आदेश पर लगी रोक को भी आगे बढ़ा दिया है, जिसमें केवल 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की सिफारिश की गई थी। पर्यावरण मंत्रालय की समिति की इस सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट पहले ही पुनर्विचार योग्य मानते हुए स्थगित कर चुका है।
कोर्ट का कहना है कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और इसे जल्दबाजी में तय नहीं किया जा सकता। इसलिए नई विशेषज्ञ समिति तथ्यों और वैज्ञानिक आधार पर अरावली की परिभाषा को लेकर सिफारिश देगी।
अवैध खनन पर सख्ती के संकेत
सुनवाई के दौरान राजस्थान के कई इलाकों में जारी अवैध खनन का मुद्दा उठाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने राजस्थान सरकार के वकील को तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अरावली जैसा नाजुक पर्यावरणीय क्षेत्र किसी भी तरह का अतिरिक्त दबाव सहन नहीं कर सकता।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन भविष्य की पीढ़ियों के पर्यावरणीय अधिकारों पर सीधा हमला है। इसी कारण अदालत इस पूरे मामले की हर पहलू से गहन जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष दिसंबर में पारित अंतरिम आदेश अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
साथ ही, सभी हस्तक्षेपकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे एमिकस क्यूरी के माध्यम से अपनी रिपोर्ट और सुझाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।