Independene Day 2020: देश शनिवार को अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस मौके पर देश लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के प्रतीक लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा फहराएंगे और देश के नाम संबोधन देंगे। यह 7वीं बार होगा जब पीएम मोदी लाल किले पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं। लालकिले पर 74वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शनिवार (15 अगस्त) को झंडा फहराने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहयोग एक महिला सैन्य अधिकारी करेंगी। रक्षा मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी कार्यक्रम के ब्योरे में यह जानकारी दी गई है। फ्लैग ऑफिसर मेजर श्वेता पांडे भारतीय सेना के 505 बेस वर्कशॉप से एक ईमई (इ्लेक्ट्रॉनिक व मैकेनिकल इंजीनियर) अधिकारी हैं। पहले भी कई महिला अधिकारियों ने इस भूमिका को निभाया है और गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व किया है।
ऐसा करते ही वो एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। यह रिकॉर्ड है देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री द्वारा सबसे ज्यादा बार लाल किले पर तिरंगा फहराने का।
कार्यकाल के लिहाज से तो मोदी ने गुरुवार को ही अटल बिहारी वाजपेयी को पीछे छोड़कर चौथे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड बनाया है। वाजपेयी अपने सभी कार्यकाल को मिलाकर कुल 2268 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। लाल किले पर सबसे अधिक बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है।
प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को जब सातवीं बार तिरंगा फहराएंगे तो वह अटल बिहारी वाजपेयी के गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में छह बार लाल किले पर तिरंगा फहराने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे। मोदी 2024 में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने तक 10 बार लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य हासिल कर मनमोहन सिंह के साथ संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर आ जाएंगे।
15 अगस्त, 1947 को लाल किले पर तिरंगा फहराकर भारत की आजादी का जयघोष करने वाले पंडित नेहरू ने 17 बार लगातार लाल किले पर तिरंगा फहराया था। पंडित नेहरू के निधन के बाद गुलजारी लाल नंदा केवल 14 दिन प्रधानमंत्री रहे और उनके सामने ऐसा मौका आया ही नहीं। असमय निधन के कारण लाल बहादुर शास्त्री को जून 1964 से जुलाई 1966 के बीच दो बार ही लाल किले पर तिरंगा फहराने का अवसर मिल पाया।
शास्त्री के निधन के बाद गुलजारी लाल नंदा को दोबारा 15 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला, लेकिन तिरंगा फहराने का सौभाग्य उन्हें नहीं मिला।
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनवरी, 1966 से मार्च, 1977 के बीच लगातार 11 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। आपातकाल के बाद हुए चुनाव में सत्ता से बाहर हुईं इंदिरा गांधी राजनीतिक वापसी करते हुए जनवरी, 1980 में फिर प्रधानमंत्री बनीं और 31 अक्टूबर, 1984 को अपनी हत्या तक देश की शीर्ष कार्यपालिका के पद पर रहीं। इस दौरान इंदिरा गांधी ने पांच बार तिरंगा फहराया। इस तरह अपने पिता पंडित नेहरू के बाद लाल किले पर 16 बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड उनके नाम है। राजीव गांधी को भी 1984 से 1989 के बीच बतौर प्रधानमंत्री पांच बार लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला।
तिरंगा फहराने के इस रोचक इतिहास में नया मोड़ आया दिसंबर, 1989 में आया जब विश्वनाथ प्रताप सिंह दूसरी गैरकांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री बने। लेकिन नवंबर, 1990 में उनकी सरकार का पतन हो गया और वह एक बार ही लाल किले पर तिरंगा फहरा सके। कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर जून, 1991 तक सात महीने पद पर रहे मगर लाल किले पर तिरंगा फहराने के सौभाग्य से दूर रह गए। जून, 1991 से मई, 1996 तक प्रधानमंत्री रहे नरसिम्हा राव ने पांच बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। राजीव गांधी और राव इस सूची में संयुक्त रूप से छठे नंबर पर हैं।
1996 के चुनाव के बाद अटल बिहारी वाजपेयी 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री जरूर बने, पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का पहला मौका मार्च, 1998 में हुए चुनाव के बाद 13 महीने की सरकार के दौरान मिला। 1999 के चुनाव में भी उनकी वापसी हुई। इस तरह मार्च, 1998 से मई, 2004 के बीच वाजपेयी ने लगातार छह बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। मोदी के सात बार का रिकॉर्ड बनाने के बाद अटल इस सूची में अब पांचवें स्थान पर चले जाएंगे। इससे पहले जून, 1996 से मार्च, 1998 के दौरान प्रधानमंत्री रहे एचडी देवगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल को एक-एक बार लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला था।
कांग्रेसी पीएम
जवाहर लाल नेहरू - 17 बार
इंदिरा गांधी - 16 बार
मनमोहन सिंह - 10 बार
राजीव गांधी - 5 बार
पीवी नरसिम्हा राव - 5 बार
लाल बहादुर शास्त्री - 2 बार
गुलजारी लाल नंदा - 0 बार
गैरकांग्रेसी पीएम
अटल बिहारी वाजपेयी - 6 बार
नरेंद्र दामोदर दास मोदी - 6 बार
मोरारजी देसाई - 2 बार
चरण सिंह - 1 बार (कांग्रेस के समर्थन से)
वीपी सिंह - 1 बार
एचडी देवगौड़ा - 1 बार
इंद्रकुमार गुजराल - 1 बार
चंद्रशेखर - 0 बार