
डिजिटल डेस्क। यह भारत के कूटनीतिक और आर्थिक इतिहास के लिए एक युगांतरकारी क्षण है। 18 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और जटिल वार्ताओं के बाद, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। 27 देशों के इस समूह के साथ हुई इस डील को विशेषज्ञ 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कह रहे हैं।
भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ ने शनिवार को एक नए आर्थिक युग की नींव रखी। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ इस महा-समझौते का एलान किया। यह समझौता इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार यूरोपीय संघ के नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को 'साझा समृद्धि का नया ब्लू प्रिंट' बताया। उन्होंने एक सुखद संयोग का जिक्र करते हुए कहा, "आज 27 तारीख है और आज ही के दिन यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न किया है।"
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के जमीनी स्तर के उत्पादकों को मिलेगा:
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यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत और EU अब ट्राइ-लैटरल प्रोजेक्ट्स के जरिए इंडो-पैसिफिक से लेकर कैरेबियन देशों तक सहयोग करेंगे। इसके तहत मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा: