मल्टीमीडिया डेस्क। जन्नत के ताज से नवाजे गए कश्मीर में बला की खूबसूरती चारों और पसरी हुई है। देवदार के दरख्त, झेलम और चिनाब दरिया, डल और वूलर जैसी झीलें, बर्फ से ढंके ऊंचे आसमान से बात करते पहाड़ से लेकर प्रकुति का अनमोल धरोहर यहां पर है। कायनात ने अपने खजाने के दिल खोलकर लुटाया है। कश्मीर के हर हिस्से की अपनी एक खासियत है और इन्हीं खासियतों से कश्मीर का अलहदा अक्स दुनिया के सामने नजर आता है। आइए एक नजर डालते हैं जम्मू और कश्मीर के स्वरूप पर।

कहा जाता है कि जम्मू और कश्मीर को महर्षि कश्यप और महाराजा जम्मू लोचन ने बसाया था। वर्तमान में जम्मू और कश्मीर कुल क्षेत्रफल और अलग-अलग हिस्सों में बंटा क्षेत्रफल इस प्रकार हैं।

कुल क्षेत्रफल - 2,22,236 वर्ग किलोमीटर ( 100 फीसद )

पाकिस्तान के कब्जे में कश्मीर - 78, 114 वर्ग किलोमीटर ( 35.15 फीसद )

पाकिस्तान ने चीन को दिया - 5, 180 वर्ग किलोमीटर ( 2.21 फीसद )

चीन के कब्जे में - 35,555 वर्ग किलोमीटर ( 16.92 फीसद )

भारत के पास - 1.01,387 वर्ग किलोमीटर 9 45.64 फीसद )

भारत के पास वाले जम्मू और कश्मीर में जम्मू, राजौरी- पूंछ, कठुआ और लद्दाख जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बंटा हुआ है।

जम्मू

जम्मू शहर को महाराजा जम्मूलोचन ने बसाया था। जम्मू को सूबे की शीतकालीन राजधानी का रुतबा हासिल है। इसके साथ ही इस शहर में रघुनाथ मंदिर, रणवीरेश्वर मंदिर और प्रसिद्ध माता वैष्णोदेवी मंदिर भी इसी के नजदीक है।

राजौरी- पूंछ

ये दोनों सीमावर्ती जिले हैं इस जगह पर एक भव्य नगर रावण का दादा पुलस्त्य मुनि ने बसाई थी। इस नगर का पहले नाम पुलस्त्य था जो बाद में बदलकर पुंछ हो गया। इस जगह पर आज भी पुलस्त्य नाम की नदी बहती है।

कठुआ

कठुआ मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र का मिला-जुला स्वरूप है। आतंकी के दस्तक देने के बाद इस जगह पर भी कई आतंकी गतिविधियां हुई है।

लद्दाख

समुद्र तल से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा लद्दाख चारों और प्रकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है। इस हिस्से की बड़ी आबादी बौद्ध धर्मावलंबियों की है, जबकि कारगिल मुस्लिम बहुल इलाका है।

श्रीनगर

श्रीनगर को कश्मीर का प्रमुख शहर कहा जाता है और डलझील और उसके शिकारे इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।

इसके अलावा अनंतनाग, डोडा, किश्तवाड़ जैसे सामरिक दृष्टि से काफी अहम इलाके हैं।