
मल्टीमीडिया डेस्क। मादक पदार्थों और द्रव्यों के सेवन को हतोत्साहित करने के लिए 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के साथ ही युवाओं को इस बुराई के प्रति जागरूक करना है।
हाल ही में हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर कह चुके हैं कि दुनियाभर में नशीले पदार्थों का कारोबार पांच हजार अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया है। इस लिहाज से देखा जाए तो यह पेट्रोलियम और हथियारों के कारोबार के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013 और इस साल अब तक देशभर में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 34 हजार 684 मामले सामने आए हैं। इनमें से सबसे अधिक मामले पंजाब से हैं और दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है। एक अनुमान के मुताबिक देश में 7.3 करोड़ लोग नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें : भारत में अकबर के काल में शुरू हुआ तम्बाकू का नशा
पंजाब की जनसंख्या के 67 फीसद लोग नशे से ग्रसित हैं। सुप्रीम कोर्ट भी युवाओं के तम्बाकू, ड्रग्स, भांग, सूंघने वाले मादक पदार्थों और नशे की खतरे की हद तक बढ़ रही लत पर गंभीर चिंता जाहिर कर चुकी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तू की पीठ ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर इस बारे में जबाव मांगा है।
नारकोटिक्स अधिकारियों के मुताबकि मादक पदार्थों की सबसे ज्यादा तस्करी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से होती है, जिसका मुख्य केंद्र भारत-पाक सीमा है। बताया जाता है कि इस कारोबार में दिल्ली में रहने वाले अफ्रीकी और अफगानी सबसे ज्यादा शामिल हैं। दिल्ली को ड्रग के ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
अवैध मादक पदार्थों के 20 शीर्ष उत्पादकों में भारत भी
दक्षिण एशियाई देशों में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार अवैध मादक पदार्थों के 20 शीर्ष उत्पादकों में शामिल हैं। भारत में पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के कुछ भागों में अफीम की अवैध खेती हो रही है। गौरतलब है कि बोलीविया, वेनेजुएला और म्यांमार नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए कुख्यात हैं। दुनिया में सबसे अधिक अफीम की उत्पादन करने वाला देश अफगानिस्तान है। एक अनुमान के मुताबिक अफगानिस्तान में करीब साढ़े चार हजार मीट्रिक टन अफीम पैदा होती है।
पूर्वोत्तर में अधिक हैं तंबाकू के आदी युवा
बचपन बचाओ के लिए नोबल पुरस्कार जीतने वाले कैलाश सत्यार्थी के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में 96, नगालैंड में 95, सिक्किम में 93 और उत्तराखंड 90 फीसद युवा तम्बाकू का सेवन करते हैं। दिल्ली में यह प्रतिशत 69 है। शराब पीने वाले किशोरों की तादाद सबसे ज्यादा कर्नाटक में 88 फीसद है। आंध्र का नम्बर दूसरा है, जबकि हरियाणा और चंडीगढ़ में यह आंकड़ा 80 फीसद है। दिल्ली में यह संख्या 23 फीसद ही है।
हर राज्य में अलग है नश्ो का कारोबार
भांग के आदी किशोरों की तादाद सबसे ज्यादा उत्तराखंड में 70 फीसद है। हरियाणा में यह 63 फीसद और दिल्ली में 34 फीसद ही है। सूंघकर नशा करने वाले इलाकों में मध्य प्रदेश की 66 फीसद और हरियाणा की 46 फीसद आबादी इसकी लती है। उत्तराखंड में यह मात्र सात फीसद है। हेरोइन के सबसे ज्यादा लती युवा 19 फीसद पंजाब में हैं, जबकि दिल्ली और यूपी में यह संख्या 10 फीसद है। इंजेक्शन से नशा लेने वालों इंजेक्टीबल नशे के शिकार युवकों में सबसे ज्यादा तादाद महाराष्ट्र, राजस्थान और पंजाब की है। देश में गांजा पीने वालों की तादाद करीब 90 लाख है।