मुंबई। अभिनेता इरफान खान ने खुलासा किया है कि उन्हें 'न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर' है। यह कैंसर दिमाग में ही नहीं बल्कि फेफड़े, पेट में पैंक्रियाज और आंतों में भी हो सकता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी की जल्द पहचान हो तो इलाज आसान होता है। इस बीमारी के कई स्तर हैं। पहला और दूसरा सामान्य होता है, जबकि तीसरा खतरनाक होता है।

जानिए क्या होती है यह बीमारी

  • एंडोक्राइन सिस्टम - शरीर का एंडोक्राइन सिस्टम यानी अंतःस्त्रावी तंत्र कोशिकाओं (सेल्स) से बना होता है, जो हार्मोन्स पैदा करता है। यह हार्मोन्स रासायनिक तत्व होते हैं जो रक्तवाहिनियों के जरिए प्रवाहित होकर शरीर के अन्य अंगों को काम करने में मदद करते हैं।
  • ट्यूमर - शरीर में मौजूद कोशिकाओं का वह भाग है, जो अनियंत्रित होकर अचानक बढ़ने लगता है। धीरे-धीरे यह मांस के लोथड़े के रूप में इकट्ठा होने लगता है। ट्यूमर खतरनाक ही हो, यह जरूरी नहीं। कई बार इसमें कैंसर पनप जाता है और कई बार यह बिना परेशानी के शरीर में यूं ही पड़ा रहता है। कैंसरयुक्त ट्यूमर घातक होता है। इसका शुरुआती चरण में पता न चले तो यह अन्य अंगों में भी फैल जाता है। ऐसा ट्यूमर जिसमें कैंसर नहीं है वह बढ़ता तो है, लेकिन अन्य अंगों में नहीं फैलता और इसे बिना नुकसान आसानी से हटाया जा सकता है।
  • न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर - ऐसा उस अंग में बनता है, जहां हार्मोन्स बनते और रिलीज होते हैं। यह इसलिए क्योंकि एंडोक्राइन ट्यूमर उन सेल्स से बनता है, जो हार्मोन्स बनाते हैं और ट्यूमर भी हार्मोन्स बना सकता है। ऐसा होता है तो यह बहुत ही गंभीर बीमार कर सकता है। जिन सेल्स में यह ट्यूमर पैदा होता है वह हार्मोन्स बनाने वाले एंडोक्राइन सेल्स और नर्व सेल्स का कॉम्बीनेशन होते हैं। इरफान खान ने अपने ट्वीट में ठीक ही लिखा है कि न्यूरो का मतलब सिर्फ दिमागी नसों से नहीं है। न्यूरोक्राइन सेल्स पूरे शरीर में पाए जाते हैं, जैसे- फेफड़ों में, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट आदि में।

वरिष्ठ कैंसर सर्जन और इंदौर कैंसर फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. दिगपाल धारकर के अनुसार, न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर एक अलग कैंसर होता है। इसे कैंसर के क्लासिफिकेशन में 10 से 15 साल पहले ही जोड़ा गया है। इसका पता लगाने के लिए 'क्रोमोग्राफिन ऐसे' और 'क्रोमेटिन टेस्ट' की जाती है। इसके बाद प्रायमरी या सेकंडरी स्टेज का पता लगाया जा सकता है। न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर में पीनेट ट्यूमर की उत्पत्ति अमूमन कोलोन, फेफड़ों में या फिर शरीर के किसी और भाग में होती है।

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