
नई दिल्ली। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट को मंगलवार को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता कभी गर्भवती नहीं थीं। इस मामले में सरकार ने 1980 के दशक में रिकॉर्ड किए गए जयललिता के वीडियो भी अदालत में पेश किए हैं। दरअसल, बेंगलुरू की रहने वाली अमृता ने कोर्ट में केस दायर कर दावा किया है कि वह जयललिता की बेटी हैं।
इस केस की बहस की बहस के दौरान एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने कोर्ट में कहा कि एआईडीएमके की नेता कभी गर्भवती नहीं हुई थीं। एडवोकेट जनरल ने कहा कि केस करने वाली महिला की मंशा जयललिता की सम्पत्ति पर कब्जा करने की है। साथ ही उन्होंने महिला से पूछा कि उन्होंने कभी जयललिता के साथ कभी तस्वीर क्यों नहीं खिंचवाई?
साथ ही विजय नारायण ने जस्टिस एस विद्यानाथन के सामने तर्क रखा कि अमृता ने कोर्ट को बताया है कि उसका जन्म अगस्त 1980 में हुआ है। उन्होंने कोर्ट में एक वीडियो क्लिप भी पेश की। यह क्लिप 1980 में एक फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान ली गई थी। इसके जरिये नारायण के कहा कि इस वीडियो मे जयललिता के गर्भवती होने के कोई प्रमाण नहीं दिखते। यह वीडियो महिला के जन्म का दावा करने के एक महीने पहले का है।
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इसके अलावा विजय नारायण न कोर्ट मे कहा कि जयललिता के और भी परिजन हैं, जिनके डीएनए सैम्पल से अमृता के डीएनए की तुलना की जा सकती है। अपनी याचिका मे अमृता ने कोर्ट से जयललिता की पार्थिव शरीर का हिंदू रीति-रिवाज से क्रिया-कर्म करने की अनुमति मांगी थी। अमृता ने कहा था जयललिता का अंतिम संस्कार हिंदू रीति से किया जाना चाहिए क्योंकि वह ब्राह्मण थीं।
महिला ने कोर्ट से अपील कि है कि उसका डीएनए टेस्ट कराया जाए, ताकि उसे माता-पिता का पता चल सके। गौरतलब है कि जयललिता का एक लंबी बीमारी के बाद 68 वर्ष की आयु में 5 दिसंबर 2016 को चेन्नई में निधन हो गया था। इसके बाद उन्हें मरीना बीच पर दफनाया गया। राजनीति में आने से पहले वह एक सफल अभिनेत्री थीं। जिसके बाद उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा।
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