कोझिकोड Kerala Politics। भगवान के अस्तित्व पर विश्वास न करने वाले वामपंथी दल भी अब भगवान राम की शरण में पहुंच गए हैं। केरल में सत्तारुढ़ दल सीपीआई ने अब संघ परिवार और दक्षिणपंथी ताकतों से मुकाबला करने के लिए भगवान राम का ही सहारा ले लिया है। केरल में सीपीआई पार्टी बीते की दिनों से रामायण पर चर्चा करा रही है। केरल में मलप्पुरम जिला समिति ने रामायण महाकाव्य पर ऑनलाइन प्रवचनों की सात दिन की एक श्रृंखला आयोजित की गई। मिली जानकारी के मुताबिक सीपीआई की ओर से ये विचार श्रृंखला और रामायण पर टॉक सीरीज का आयोजन 25 जुलाई को शुरू किया गया था और आज शनिवार को इसका समापन हुआ। इस ऑनलाइन सीरीज को ‘रामायण एंड इंडियन हेरिटेज’ नाम दिया गया था।

राम के शरण में जाने पर ये बोले सीपीआई के नेता

मलप्पुरम सीपीआई जिला सचिव पीके कृष्णदास ने कहा कि सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतें हिंदू धर्म से जुड़ी हर चीज पर अपना विशेष अधिकारों होने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि रामायण जैसे महाकाव्य देश की साझा परंपरा और संस्कृति का हिस्सा हैं। रामायण पर टॉक सीरीज आयोजित करने के सीपीआई के फैसले पर उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा यह देखने का एक प्रयास था कि प्रगतिशील समय में रामायण जैसे महाकाव्य को कैसे पढ़ा और समझा जाना चाहिए।

रामायण में RSS जैसी राजनीति नहीं

रामायण पर आयोजित टॉक सीरीज में कई वामपंथी विचारकों ने अपने विचार रखें। इस दौरान "रामायण के युग के लोग और अन्य देशों के साथ राजनीतिक संबंध", "रामायण में समकालीन राजनीति", जैसे विषयों पर चर्चा हुई। भाकपा नेता मुलक्कारा रत्नाकरन, एम केशवन नायर, लीलाकृष्णन आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। एम केशवन नायर ने कहा कि रामायण में निहित राजनीति संघ परिवार द्वारा की जा रही राजनीति से बिल्कुल थी। वहीं कवि लीलाकृष्णन ने कहा कि यह कम्युनिस्टों की जिम्मेदारी है कि हम रामायण को सांप्रदायिक ताकतों के हाथों में एक उपकरण नहीं बनने दें। उन्होंने कहा कि हम रामायण महाकाव्य के विविध संस्करणों में दी गई बातों को उजागर करके फासीवादी व्याख्याओं का विरोध कर सकते हैं। सीपीआई हिंदू वोटरों को साधने के लिए रामायण पर टॉक सीरीज आयोजित करने से पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का फैसला भी कर चुकी है।

मलयालम माह 'कारकीडकम' में राम कथा सुनाने की है परंपरा

गौरतलब है कि केरल में 17 जुलाई से पारंपरिक रूप से मलयालम महीना 'कारकीडकम' मनाया जाता है। इस मलयालम माह में हिंदू घरों में भगवान राम की पौराणिक कथाएं सुनाई जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भारी बारिश के कारण होने वाली बीमारियां दूर हो जाती है।

Posted By: Sandeep Chourey