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MP ने नहीं उठाया बिजली क्षेत्र सुधारों से जुड़ी अतिरिक्त उधारी प्रोत्साहन योजना का लाभ, 7 राज्यों ने सस्ती दरों पर अतिरिक्त उधारी हासिल की

केंद्र सरकार की बिजली क्षेत्र सुधारों से जुड़ी अतिरिक्त उधारी प्रोत्साहन योजना के पांच वर्ष पूरे हो गए और अब इस तरह की योजना दोबारा शुरू होने की संभाव...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 07:49:22 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 07:57:40 PM (IST)
MP ने नहीं उठाया बिजली क्षेत्र सुधारों से जुड़ी अतिरिक्त उधारी प्रोत्साहन योजना का लाभ, 7 राज्यों ने सस्ती दरों पर अतिरिक्त उधारी हासिल की

HighLights

  1. छह वर्षों में कुल 1.75 लाख करोड़ रुपये की उधारी की सुविधा मिली
  2. पिछले साल सिर्फ सात राज्यों ने उठाया 26,770 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज
  3. छह वर्षों में कुल 1.75 लाख करोड़ रुपये की उधारी की सुविधा मिली

जयप्रकाश रंजन, नईदुनिया, नई दिल्ली। केंद्र सरकार की बिजली क्षेत्र सुधारों से जुड़ी अतिरिक्त उधारी प्रोत्साहन योजना के पांच वर्ष पूरे हो गए और अब इस तरह की योजना दोबारा शुरू होने की संभावना भी नहीं है। इसके बावजूद राज्यों में खास उत्साह नहीं दिख रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सिर्फ सात राज्यों (आंध्र, केरल, पंजाब, राजस्थान, सिक्कम व तमिलनाडु) ने योजना की शर्तें पूरी कर सस्ती दरों पर कुल 26,770 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी हासिल की।

इन बड़े राज्यों को केंद्र से इस मद में कोई मदद नहीं मिली

लेकिन बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को केंद्र से इस मद में कोई मदद नहीं मिली। पिछले वर्षों में भी आमतौर पर पांच-सात राज्यों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया था। गुजरात, महाराष्ट्र जैसे वित्तीय तौर पर मजबूत राज्यों की स्थिति तो समझी जा सकती है कि उनकी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) की स्थिति पहले से ही बेहतर है।


लिहाजा उन्होंने केंद्र की स्कीम को खास तवज्जो नहीं दिया, लेकिन अन्य राज्यों ने अपनी खस्ताहाल डिस्काम के बावजूद केंद्र की योजना का फायदा नहीं उठाया। अब तक कुल 1,75,131 करोड़ की अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी जा चुकी है।

योजना 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित है

यह योजना 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। केंद्र ने कोरोना काल की चुनौतियों के बीच देश में व्यापक बिजली सुधार करने के उद्देश्य से बजट 2021-22 में इस योजना की घोषणा की थी। इसके तहत राज्यों को सामान्य उधारी सीमा (जीएसडीपी का 3 प्रतिशत) से ऊपर 0.5 फीसद तक अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी जाती है, बशर्ते वे बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) में निर्धारित सुधार और प्रदर्शन मानदंड पूरे करें।

इस योजना का ये है मुख्य उद्देश्य

योजना मूल रूप से 2021-22 से 2024-25 तक थी, जिसे 2025-26 तक बढ़ाया गया। मुख्य उद्देश्य डिस्काम की वित्तीय-परिचालन दक्षता सुधारना, बिजली चोरी रोकते हुए ट्रांसमिशन व वितरण हानि (एटीएंडडी) हानि को कम करना, सब्सिडी की सही जांच करना, पूरे देश में स्मार्ट मीटर को बढ़ावा देना और सरकारी विभागों द्वारा समय पर बिल भुगतान सुनिश्चित करना था।

बिजली मंत्रालय की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय अनुमति देता है

बिजली मंत्रालय की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय अनुमति देता है। राशि प्रदर्शन के आधार पर जीएसडीपी के 0.25 से 0.50 तक अतिरिक्त उधारी दी जा सकती है। तालिका के अनुसार तमिलनाडु (38,864 करोड़ रुपये), राजस्थान (31,394 करोड़ रुपये), आंध्र प्रदेश (31,155 करोड़ रुपये) और केरल (25,186 करोड़ रुपये) ने सबसे ज्यादा फायदा उठाया।

वहीं बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश (केवल 2021-22 में मिला) जैसे बड़े राज्यों को कई वर्षों में यह सुविधा नहीं मिली। कुछ राज्य (जैसे गुजरात) पहले से बेहतर प्रदर्शन वाले हैं।

इसलिए उन्हें अतिरिक्त उधारी की जरूरत नहीं महसूस हुई। लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां डिस्काम की वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं है, वहां से भी इस योजना का पूरा फायदा नहीं उठाया जाना आश्चर्यजनक है।

कुछ राज्यों ने आवेदन किए पर निर्धारित शर्तें पूरी नहीं की

बिजली मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कुछ राज्यों ने आवेदन किए थे लकिन निर्धारित शर्तें (घाटे का अधिग्रहण, समय पर ऑडिट नहीं करना, सीधे ग्राहकों के खाते में सब्सिडी देने की प्रक्रिया में धीमी प्रगति आदि) पूरी नहीं कीं या पर्याप्त दस्तावेज जमा नहीं किए।

बिजली मंत्रालय ने हाल ही में संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक देश के डिस्काम का कुल बकाया कर्ज लगभग 7.26 लाख करोड़ रुपये और संचित घाटा करीब 6.47 लाख करोड़ रुपये था। इस अवधि में बिहार के डिस्काम का संचित घाटा लगभग 16,526 करोड़ रुपये व कर्ज 14,002 करोड़ रुपये था।

मध्य प्रदेश में घाटा करीब 71,394 करोड़ रुपये

उत्तर प्रदेश में संचित घाटा 1,00,858 करोड़ रुपये और कर्ज 61,395 करोड़ रुपये था। मध्य प्रदेश में घाटा करीब 71,394 करोड़ रुपये व कर्ज 49,239 करोड़ रुपये था। पंजाब के डिस्काम के कर्ज 17,411 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश का घाटा 3,391 करोड़ रुपये व कर्ज 7,024 करोड़, झारखंड का घाटा 20,512 करोड़ रुपये व कर्ज 22,381 करोड़ रुपये था।

राष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसमिशन व वितरण क्षेत्र में घाटा काफी कम हुआ है और यह करीब 15 फीसद तक आ गया है। फिर भी कई बड़े राज्यों में चुनौतियां बनी हुई हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि यह योजना 2025-26 के बाद आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

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