
वाराणसी। वाराणसी दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे। उनके साथ कार्यक्रम में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद रहीं। विद्यार्थियों को उपाधियां देने के बाद पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह दीक्षांत समारोह नहीं बल्कि शिक्षा के आरंभ का समारोह है। यह शिक्षा के अंत का नहीं वरन शिक्षा से प्राप्त गुर को आजमाने का आरंभ है। हमारे अंदर का विद्यार्थी कभी मरना नहीं चाहिए। वही जिंदा रहता है जो आजीवन विद्यार्थी रहता है।
आज जब हम इस दीक्षांत से निकल रहे हैं तो हमारे सामने एक विशाल विश्व है। अब आप कैंपस से निकलकर दुनिया में कदम रख रहे हैं। एक ओर खुशी होती है, लेकिन अब परिसर से निकलते ही मुझे देखने का दुनिया का नजरिया बदल जाएगा। मन में यह भाव रखना होगा क्योंकि अब लोग पूछेंगे कि बताओ भैया अब क्या करोगे। ...ऐन यहीं से जिंदगी की कसौटी का आरंभ हो जाएगा।
दीक्षांत समारोह एक नई प्रेरणा का अवसर भी होता है। जिज्ञासा की जड़ों को अब और मजबूत करते चलिए। यह मुरझाई तो नित नूतन करने का आनंद ही नहीं ले पाएंगे। जीवन कभी मुरझाना नहीं चाहिए। जीवन खिला रहना चाहिए। संकट के सामने भी उसे झेलने का सामर्थ्य होना चाहिए। तात्कालिक चीजों से जो घबरा जाता है, उसके लिए ज्ञान का प्रकाश ही पथ बनाता है।
देश-दुनिया के सामने बेहद चुनौतियां हैं। उनके बीच में आपकी भूमिका क्या हो, इसे तलाशें। समझें कि मैं कुछ ऐसा कर जाऊं कि लोग युगों तक याद रखें। नए-नए अनुसंधान के बारे में सोचें, महज डिग्री के लिए पढ़ने का क्या मतलब है। आदिवासी क्षेत्रों में कई गंभीर बीमारियां फैली हैं, क्या निदान का कोई उपाय हम खोज सकते हैं?
ग्लोबल वार्मिग को लेकर उन्होंने कहा कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है। पूरी दुनिया पेरिस में जुटी थी, दो डिग्री तापमान कम करना है वरना न मालूम कितने आइलैंड डूब जाएंगे। क्या हम ये चुनौती स्वीकार कर सकते हैं। हमारे भीतर तमाम तत्व ज्ञान है, हम दुनिया को परिवार और ब्रह्मांड को कुनबा मानते हैं। हम सूरज को दादा और चांद को भी मामा कहते हैं। क्या हम दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए कोई ठोस रास्ता दिखा सकते हैं?
पीएम बोले प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं, संवाद होना चाहिए। हम अमेरिका, भारत, फ्रांस व बिल ग्रेट्स एक साथ इस मामले पर काम कर रहे हैं। पहली बार दुनिया के सूर्य से आशीर्वाद प्राप्त 122 देशों का संगठन बना है, भारत जिसका अध्यक्ष है। तो हमारी जिम्मेदारी भी बड़ी है। हमारे गन्ना किसान भी परेशान हैं। क्या बीएचयू इस दिशा में कुछ कर सकता है? क्या सोलर एनर्जी की दिशा में हम कुछ कर सकते हैं? मैं बीएचयू के होनहारों को चुनौती देने आया हूं - आईए, सपने बड़े देखिए। दुनिया के लिए कुछ करिए।
इससे पहले उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को याद किया। पीएम ने कहा कि आज विजनरी किसे कहते हैं, यह समझाना सबके लिए संभव नहीं होगा, आसान नहीं होगा मगर आज से सौ साल पहले मालवीय जी ने साबित किया कि दिव्यदृष्टि व दूरदर्शी किसे कहते हैं।
अंग्रेज भी विश्वविद्यालय बना रहे थे मगर उनका मकसद था अपने हित में करोबारियों को तैयार करना। इसके उलट महामना जी ने भारतीय परंपराओं को जिंदा रखने के लिए बीएचयू की स्थापना की। उसी दौरान महात्मा गांधी ने गुजरात में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की थी। आज मैं देख रहा हूं कि उन्होंने कितना श्रम किया होगा। यह उनकी मेहनत व दूरद्ष्टि की ही देन है कि हम आज इस विशाल वट वृक्ष के नीचे संस्कार की पाती पढ़ रहे हैं। ऐसे मालवीय जी व ऐसे सभी महानुभावों को शत्-शत् नमन।
पीएम ने कहा कि महामना और गांधी जी दोनों युवाओं को यह सिखाना चाहते थे कि देश के लिए कैसे योगदान दिया जाएगा। यहां से पढ़े लोग कभी सीना तानकर कहते थे कि मैं बीएचयू का स्टूडेंट हूं। यहां से पढ़े लोग जहां गए, अपने काम से झंडा गाड़ दिया। एक संस्था की ताकत क्या होती है, यह बीएचयू ने दिखाया है। यह बहुत बड़ी बात है। लेकिन कभी-कभी सवाल उठता है कि क्या भारत के सवा सौ करोड़ लोगों के मन में भी बीएचयू के प्रति वही श्रद्धा भाव है। आखिर वो कौन सी बाधा है कि इस श्रद्धा भाव में कहीं न कहीं संकोच है।
उन्होंने कहा कि योग कोई नई चीज नहीं है। भारत में सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। योग को लेकर हमेशा जिज्ञासा रही है मगर हमें लगता था कि शायद योग में वह ताकत नहीं। हालांकि बीते साल इसी भारतीय योग को संयुक्त राष्ट्र ने विश्वव्यापी मान्यता देते हुए इस हेतु एक दिवस घोषित किया। यह है अपनी ताकत को पहचानने का नतीजा।
डिग्री के लिए फिर किया इन्कार
संबोधन समाप्त होने के बाद पीएम एक बार फिर मंच पर आए और कहा कि मुझे विनम्रता पूर्वक कहना है कि बीएचयू से मेरे पास पाती आई थी कि मुझे डॉक्टरेट की उपाधि देना चाहते हैं। बुरा मत मानना, मैं इस काबिल नहीं इसीलिए इन्कार किया। मैं कहीं भी डिग्री नहीं लेता। यहां आना ही मेरे लिए गौरव की बात है। बनारस ने मुझे जो दिया है वो कोई यूनिवर्सिटी नहीं दे सकती, लेकिन आपने मुझे उपाधि लायक माना उसके लिए आभार।
रविदास मंदिर में की पूजा
इससे पहले रविवार रात वाराणसी पहुंचने के बाद सोमवार सुबह संत रविदास जयंती महोत्सव में शामिल होने संत रविदास मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद पीएम बीएचयू शताब्दी दीक्षांत समारोह में भाग लेने निकल गए।
मंदिर जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीरेका गेस्ट हाउस से सीर गोवर्धन स्थित रविदास मंदिर के लिए निकलने के पूर्व ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, 'मैं संत रविदास के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए आज उनकी पावन जयंती के अवसर पर उनके मंदिर जा रहा हूं। महान संत रविदास की शिक्षा ने सामाजिक चेतना व एकता को मजबूत करने के लिए बेहद अहम भूमिका निभाई है।'
हुआ विरोध, काले कपड़े पहनने पर पाबंदी
पीएम के रविदास मंदिर पहुंचने के बाद कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। यहां 'मोदी वापस जाओ' के नारे भी गूंजे। सुरक्षा के कारण संत निरंजन दास को रोका, जिसके बाद श्रद्धालु धरने पर बैठ गए। यह श्रद्धालु संत निरंजन दास को रोके जाने का विरोध कर रहे थे। खबर यह भी है कि मोदी के दौरे के चलते बीएचयू में काले कपड़े पहनने पर पाबंदी लगा दी गई है। ऐसा मोदी के विरोध की आशंका के चलते किया गया है। इस बीच पीएम को काले झंडे दिखाने की कोशिश कर रहे दो युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।