नई दिल्ली। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को रामायण के जरिए घर-घर तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति को अयोध्या के श्रीराम मंदिर में स्थापित किया जाएगा । यह बात विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कही है। आलोक कुमार ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने ही जगत को रामायण दी है। रामकथा का ज्ञान बताया। वह असाधारण तपस्वी थे। वह जब तप में लीन हुए तो उनके शरीर पर दीमक ने अपना घर बना लिया था। आलोक कुमार ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति मंदिर के मुख्य परिसर में ही स्थापित की जाएगी। आलोक कुमार दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में भारतीय बौद्ध संघ द्वारा आयोजित आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर समरसता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया के दवारा की गई। अन्य विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष मनहर वाल्जी भाई झाला और सुलभ इंटरनेशनल के बिदेश्वरी पाठक शामिल थे। इस अवसर पर आलोक कुमार ने कहा, विश्वास है कि राममंदिर पर फैसला हमारे पक्ष में आएगा, क्योंकि हमारे तर्क मजबूत हैं। मंदिर के पक्ष में ढेरों सबूत रखे हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में समरसता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। दिल्ली की सभी रामलीलाओं में महर्षि वाल्मीकि के चित्र भी दिखाई देते हैं। इसी तरह अनुसूचित समाज के लोगों को पूजा के लिए और मंदिरों में बुलाया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि राम के बेटों लव और कुश का लालन पालन भी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में हुआ, तभी उनके व्यक्तित्व में इतना निखार और शौर्य आया कि उन्होंने राम की सेना को भी परास्त कर दिया। वनवास के दौरान श्रीराम, शबरी और निषाद से भी मिले और उन्होंने छोटे बड़े का कोई भेदभाव नहीं रखा। दिल्ली के तुगलकाबाद में संत रविदास के मंदिर के पुर्ननिर्माण की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट से जीतने को कुछ लोगों द्वारा एक समाज विशेष की जीत बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वाल्मीकि, रविदास के साथ ही गुरुनानक देव जैसे महापुरुष पूरे भारत के संत थे। इनके बिना देश का आध्यात्म अधूरा है।