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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 31, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Malegaon Bomb Blast से लेकर कोर्ट केस और फैसले तक.... Timeline में समझिए पूरा केस

मालेगांव विस्फोट मामले में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत के जज ए.के. लाहोटी ने फैसला सुनाया। NIA कोर्ट ने मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह,...और पढ़ें

By Akash SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Thu, 31 Jul 2025 11:03:36 AM (IST)Updated Date: Thu, 31 Jul 2025 11:44:14 AM (IST)
Malegaon Bomb Blast से लेकर कोर्ट केस और फैसले तक.... Timeline में समझिए पूरा केस
Malegaon bomb blast case Timeline: मालेगांव बम ब्लास्ट केस में आज आया कोर्ट का फैसला

HighLights

  1. मालेगांव बम ब्लास्ट केस में आज आया कोर्ट का फैसला।
  2. भारत के सबसे लंबे मामलों में से एक है ये केस।
  3. साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित जैसे बड़े नाम थे शामिल।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए शक्तिशाली विस्फोट (Malegaon bomb blast) के सत्रह साल बाद, मुंबई की एक विशेष NIA अदालत आज 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाया। आपको बता दें कि 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया था। तब से, कई आरोपपत्र और पूरक रिपोर्ट दायर की जा चुकी हैं। सात अभियुक्तों के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप तय होने के बाद 2018 में मुकदमा शुरू हुआ और आज यानी 31 जुलाई को NIA कोर्ट ने इस मामले 17 साल बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में पूर्व BJP सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह और पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित ठाकुर सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है।

क्या था मामला?

आपको बता दें कि 29 सितंबर, 2008 की रात मालेगांव के भिक्कू चौक के पास हुए विस्फोट में छह लोग मारे गए और सौ से ज़्यादा घायल हुए। एक व्यस्त चौराहे के पास एक मोटरसाइकिल में लगा बम फट गया, जिससे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस कस्बे में दहशत और अफरा-तफरी मच गई। मालेगांव विस्फोट का मुकदमा हाल के दिनों में सबसे जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील आतंकवादी मुकदमों में से एक रहा है।


पूर्व BJP सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत कई बड़े नाम आए सामने

शुरुआत में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की ओर से जांच किए जाने के बाद, इस मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब जांच के दौरान हिंदू दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े लोगों की गिरफ़्तारी हुई। इसके बाद विवादास्पद राजनीतिक मुहावरा "हिंदू आतंक" सामने आया। गिरफ़्तार किए गए लोगों में पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित भी शामिल थे, जिन्होंने अपनी संलिप्तता से इनकार किया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

दोनों ने आरोपों से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें झूठा फंसाया गया तथा जांच के दौरान प्रताड़ित किया गया। 2011 में मामला अपने हाथ में लेने के बाद, एनआईए ने एटीएस द्वारा शुरू में लगाए गए कुछ आरोप हटा दिए, जिनमें महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत लगाए गए आरोप भी शामिल थे, लेकिन गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UPA) और भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए आरोप बरकरार रखे। दोनों आरोपियों को 2017 में ज़मानत मिल गई थी।

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यहां भी क्लिक करें - Malegaon Blast Case पर सुनवाई शुरू, किसी भी वक्त आ सकता है फैसला; साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित पहुंचे कोर्ट

ATS के दावे

मालेगांव विस्फोट की शुरुआत में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने जांच की थी। हेमंत करकरे के नेतृत्व वाली एटीएस ने दावा किया था कि विस्फोट दक्षिणपंथी हिंदू अतिवादी समूहों से जुड़े लोगों की ओर से किया गया था। उनकी जांच ने भारतीय आतंकवाद-रोधी आख्यानों में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया, क्योंकि यह पहली बार था जब हिंदू संगठनों से जुड़े व्यक्तियों पर आतंकवाद का आरोप लगाया गया था।

एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार किया, जिनकी मोटरसाइकिल कथित तौर पर विस्फोट में इस्तेमाल की गई थी। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि वह योजना बनाने में सक्रिय रूप से शामिल थीं और उन्होंने ही अपराधियों को वाहन उपलब्ध कराया था।

बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया और उन पर एक प्रमुख विचारक और सूत्रधार होने का आरोप लगाया गया। एटीएस ने आरोप लगाया कि पुरोहित ने अभिनव भारत समूह के साथ अपने संबंधों के माध्यम से बैठकें आयोजित कीं, लोगों की भर्ती की और विस्फोट में इस्तेमाल आरडीएक्स हासिल किया।

मामले में प्रमुख मील के पत्थर

  • 29 सितंबर, 2008: मालेगांव में विस्फोट में छह लोग मारे गए।
  • अक्टूबर 2008: एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार किया, उसके बाद पुरोहित को भी गिरफ्तार किया गया।
  • जनवरी 2009: एटीएस द्वारा पहला आरोप पत्र दायर किया गया।
  • अप्रैल 2011: एनआईए ने मामला अपने हाथ में लिया।
  • 2016: एनआईए ने पूरक आरोपपत्र दाखिल किया, कुछ आरोप हटाए लेकिन प्रमुख आतंकवाद संबंधी आरोप बरकरार रखे।
  • 2018: सात आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए।
  • 2018-2023: अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की; लगभग 40 अपने बयान से मुकर गए।
  • अप्रैल 2025: अंतिम बहस पूरी हुई। फैसला सुरक्षित रखा गया।

  • 31 जुलाई 2025: एनआईए कोर्ट ने मामले में पूर्व BJP सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह और पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित ठाकुर सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है।

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