ममता गुट को मिला 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न, अरूप रॉय गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' सिंबल
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को नई आधिकारिक पहचान दे दी है।
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 04:53:34 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 04:54:31 PM (IST)
HighLights
- ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न
- अरूप रॉय गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम
- उपचुनाव से पहले आयोग ने लिया फैसला
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को नई आधिकारिक पहचान दे दी है। आयोग ने मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बाद दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है। यह गुट आगामी चुनाव में 'फुटबॉल खिलाड़ी' के चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेगा। वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग के आदेश के बाद दोनों गुटों को 18 सितंबर की सुबह तक अपने लिए तीन नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने का निर्देश दिया गया था। ममता बनर्जी ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए गुरुवार रात को अपने विकल्प आयोग को सौंपे थे।
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के नाम को मंजूरी दे दी है। अब यह गुट आधिकारिक तौर पर 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम से जाना जाएगा और चुनाव में 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करेगा।
अरूप रॉय गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम
दूसरी ओर, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है। इस गुट को चुनाव चिह्न के रूप में 'लिफाफा' आवंटित किया गया है। दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद आगामी उपचुनावों में उनके लिए चुनाव लड़ने की स्थिति स्पष्ट हो गई है। हालांकि, मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर अंतिम विवाद अभी जारी है।
उपचुनाव से पहले आयोग ने लिया फैसला
चुनाव आयोग ने आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों से पहले दोनों गुटों को मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए थे। आयोग के नए आदेश के तहत दोनों गुट अब अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे।