
नई दिल्ली। नोटबंदी के वक्त विदेश में रहे भारतीयों के लिए सशर्त नोट बदलने का आज (31 मार्च) अंतिम मौका है। इसके बाद सिर्फ अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के ही पुराने प्रतिबंधित के नोट 30 जून, 2017 तक बदले जाएंगे।
अगर अब भी किसी के पास 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट हैं, तो फिर उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम सहारा है। शीर्ष अदालत में करीब दस ऐसे मामले दायर हैं, जिनमें नोट बदलने के लिए और अवधि मांगी गई है। अगले माह की 11 तारीख को इस पर सुनवाई है।
लेकिन अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या केंद्रीय बैंक बाजार से वापस आए प्रतिबंधित नोटों का आंकड़ा सार्वजनिक करेगा। आरबीआइ अगले पखवाड़े इसकी जानकारी नहीं दे पाता है तो उसकी साख को लेकर नए सिरे से सवाल उठने शुरू हो सकते हैं।
रिजर्व बैंक आधिकारिक तौर पर 14 दिसंबर, 2016 के बाद वापस लौटे नोटों या बाजार में प्रचलन में गए नोटों का आंकड़ा देना बंद कर चुका है। जबकि दुनिया का हर केंद्रीय बैंक हर सप्ताह या पखवाड़े बाजार में प्रचलन में गए नोटों की जानकारी देते हैं।
आरबीआइ भी अभी तक यही करता रहा है। नोटबंदी लागू होने के बाद से अब तक आरबीआइ ने जिस तरह से इससे जुड़े मामलों का प्रबंधन किया है, उससे उसके कार्यकलाप को लेकर काफी सवाल उठाए गए हैं।
नोटबंदी से जुड़े नियमों में दो महीने तक तकरीबन रोजाना बदलाव करने से लेकर आरबीआइ के कार्यालय पर नोट बदलने वालों की भीड़ प्रबंधन तक के मामले में केंद्रीय बैंक की कमियां उजागर हुई हैं। बैंकिंग सूत्रों की मानें तो संभवतः अप्रैल के पहले पखवाड़े में केंद्रीय बैंक वापस आए पुराने नोटों की जानकारी दे सकता है।
इसके पीछे एक वजह यह बताई जा रही है कि संसदीय समिति ने फिर से आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल को पेश होने का नोटिस दिया है। गवर्नर से संभवतः 20 अप्रैल को संसदीय समिति के सदस्य पूछताछ करेंगे। वे आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी लागू होने के बाद से अभी तक वापस आए नोटों का ब्योरा मांगेंगे।
पिछली बार भी वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी मांगी थी, लेकिन पटेल ने जवाब नहीं दिया था। इस पर समिति के कई सांसदों ने नाराजगी भी जताई थी। विशेषज्ञों ने पुराने आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया है कि जनवरी के अंत तक आरबीआइ के पास प्रतिबंधित नोटों का 97 फीसद हिस्सा वापस आ चुका है।
बहरहाल, शुक्रवार को नोटबंदी का एक अहम अध्याय खत्म हो जाएगा। आठ नवंबर को लागू नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर, 2016 तक सभी को पुराने नोट वापस करने का मौका दिया गया था।
इसके बाद ऐसे नोट वापस करने के लिए आरबीआइ के पांच कार्यालयों को नामित किया गया, लेकिन नोटबंदी के दौरान विदेश में रहने की कड़ी शर्त लगा दी गई। यानी आठ नवंबर से 30 दिसंबर तक देश से बाहर रहने वाले भारतीयों को ही 31 मार्च तक पुराने नोट बदलवाने की छूट है।
सिर्फ 25,000 तक बदल सकेंगे
इसके बाद सिर्फ अनिवासी भारतीय 30 जून तक अपने पुराने नोट बदल सकेंगे। लेकिन उन्हें फेमा नियम के मुताबिक ही भारतीय मुद्रा को बदलने की सुविधा मिलेगी। इस नियम के तहत उन्हें 25,000 रुपये तक लाने की ही छूट है। उन्हें इसकी जानकारी कस्टम अधिकारी को भी देनी होगी।