
नई दिल्ली/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना मुख्यालय पर आत्मघाती हमले को अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। इस आतंकी हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए। आतंकियों की साजिश की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं, जिससे साफ है कि आतंकी बड़े पैमाने पर नुकसान करने के फिराक में थे। हमलावर आतंकियों के पास भारी पैमाने पर असलहों के अलावा पूरे मिशन की लिखित योजना के होने की बात सामने आई है। आतंकी मिशन प्लान पश्तो भाषा में लिखा हुआ था।
पश्तो भाषा में दस्तावेज बरामद
मारे गए आतंकियों के पास से पश्तो भाषा में कुछ दस्तावेज बरामद हुए हैं जिसमें इस बात का जिक्र है कि उनकी योजना क्या थी। सेना के उच्च अधिकारियों के मुताबिक आतंकी पहले उन सैनिकों को मारना चाहते थे जिनके पास असलहे नहीं थे। उसके बाद उनकी योजना प्रशासनिक भवन के पास मेडिकल एड यूनिट को तबाह करने की थी और उसके बाद अधिकारियों के आवास में वो खुद को उड़ा लेते।
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आतंकियों के पास जिस नक्शे को बरामद किया गया है, उससे पता चलता है कि 12 ब्रिगेड को निशाना बनाने वाले आतंकी प्रतिबंधित संगठन सिपह-ए-सहाबा (पाकिस्तान) से जुड़े हुए थे। सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह संगठन मौलाना मसूद अजहर के संगठन जैश के अधीन काम करते हैं। सिपह-ए-सहाबा के आतंकी खुद को प्रॉफेट का रक्षक मानते हैं। जैश का मुखिया सुन्नियों से संबंधित सिपह-ए-सहाबा की समय समय पर प्रशंसा करता रहा है।
मसूद अजहर ने एक बार कहा था कि सिपह सही माएने में पाकिस्तानी देवबंद के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। सिपह से जुड़े लोग इस्लाम की रक्षा के लिए खुद को समर्पित करने के लिए तैयार रहते हैं।